कई दिनों तक पर्ची का किसान करते हैं इंतजार
गन्ने की बुवाई के समय किसानों को मिल प्रबंधन और गन्ना अधिकारियों द्वारा बड़े बड़े सपने दिखाए जाते हैं। उन्हें बताया जाता है कि इस बार गन्ने के रेट अच्छे आएंगे और गन्ना तौल के लिए पर्ची के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। अब भुगतान के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। तौल के साथ ही भुगतान हो जाएगा।
इन्हीं बातों को सुनकर किसान गन्ने की बुआई करता है, लेकिन जैसे ही गन्ना बेचने का समय आता है, किसान कई कई दिन तक पर्ची का इंतजार करते हैं। पर्ची में देरी होने पर वह मजबूर होकर गन्ने को खेत में ही या रास्ते में ही बेचने लगते हैं। इसके लिए दलाल उनके पीछे लग जाते हैं।
उन्हें लालच दिया जाता है कि गन्ना मिल में ही जाएगा और तुरंत भुगतान भी हो जाएगा। इस बार 350 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का रेट तय किया गया है, लेकिन नकद के लालच में फंस कर किसान 320 या 340 प्रति क्विंटल के हिसाब ही गन्ना बेच रहे हैं।
बिना पर्ची के गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गई
बेलवाड़ा स्थित राणा शुगर मिल में पांच दिसंबर को सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव सुरेश चंद्र ने निरीक्षण किया था। इस दौरान बिना पर्ची के गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी थी। पूछताछ में चालक ने बताया था कि उन्हें गन्ने का नकद भुगतान का लालच दिया गया था।
इस मामले में कार्रवाई तो की गई थी, लेकिन यहां अवैध गन्ना खरीद नहीं रुकी। बुधवार को गन्ना उप आयुक्त हरपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी राम किशोर समेत अन्य अधिकारियों ने फिर से छापा मारा। बेलवाड़ा स्थित शुगर मिल के यार्ड में दो ट्रैक्टर ट्रॉली मिली हैं।
चालक गन्ना समिति की कोई पर्ची नहीं दिखा पाया। एक सप्ताह के अंतराल में ही दो बार छापा और दोनों बार गन्ने की अवैध खरीद पकड़ी गई, जिससे साफ होता है कि मिल में गन्ना खरीद में खेल किया जा रहा है। जब यहां दो अवैध खरीद पकड़ी गई है तो कैसे संभव है कि जनपद मंडल और पश्चिम उत्तर प्रदेश की बाकी मिलों में नियम के मुताबिक खरीद और तौल किया जा रही होगी।
खेत से ही किसानों के पीछे लग जाते हैं दलाल
एक किसान ने बताया कि गन्ने की फसल तैयार होने लगती है तो दलाल खेत में ही आने लगते हैं। वो उन्हें बताते हैं कि शुगर मिल वाले तो भुगतान देने में बहुत देर करते हैं। पर्ची के लिए अलग से परेशान होना पड़ेगा। दलाल किसानों को बहकाते हैं कि कि उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शुगर मिल के रेट पर ही गन्ना खरीद लेंगे। कुछ किसान इनके लालच में आ जाते हैं या फिर कुछ रुपयों की जरूरत के कारण इनके जाल में फंस जाते हैं।
राणा शुगर मिल में पकड़ा गया उत्तराखंड का गन्ना
हर शुगर मिल का अपना एक एरिया होता है। उसी एरिया के गन्ने को शुगर मिल खरीदती हैं, लेकिन भोजपुर क्षेत्र के बेलवाड़ा स्थित राणा शुगर मिल में बाहरी गन्ने की खरीद की जा रही है। यहां निरीक्षण के दौरान उत्तराखंड का गन्ना पकड़ा गया है। बुधवार को अधिकारियों ने निरीक्षण किया था, जिसमें चार ट्रैक्टर-ट्रॉली ऐसी पकड़ी गई थी।
जिसके चालकों के पास के कोई पर्ची नहीं थी। एक चालक ने पूछताछ में अपना नाम राजू बताया है। वह उत्तराखंड के बाजपुर मोड स्थित कैशोवाला निवासी है। उसने बताया कि वह उत्तराखंड के विक्रमपुर से ट्रैक्टर-ट्रॉली में गन्ना लादकर लाया है। उसे बताया था कि राणा शुगर मिल में नकद भुगतान मिल जाएगा, जबकि दूसरे ट्रैक्टर का चालक मौके से भाग गया।
जिले में हैं चार शुगर मिल : बेलवाड़ा राणा शुगर मिल, अगवानपुर दीवान शुगर मिल, रानीरांगल त्रिवेणी शुगर मिल, बिलारी श्री लक्ष्मी शुगर मिल।
आंकड़ें
- गन्ना भूमि- 83940 हेक्टेयर
- गन्ना किसान- एक लाख 30 हजार
- 125 करोड़ का हो चुका हैं इस साल भुगतान
- करीब 45 लाख रुपये मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया
इस तरह होनी चाहिए गन्ने की खरीद
गन्ना समिति के सुरेश चंद्र ने बताया कि जब किसान अपने खेत में गन्ने की बुवाई करता है तो गन्ना विभाग के सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी खेतों का निरीक्षण करते हैं। फसल की पैमाइश की जाती है, जिसकी रिपोर्ट बनाकर विभाग में जमा की जाती है। इसके बाद किसान की ओर से खेत की फर्द और आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज की कॉपी के साथ गन्ने की एंट्री कराई जाती है, इसी आधार पर समिति से गन्ने की पर्ची जारी होती हैं। इस पर्ची के जरिए ही शुगर मिल में गन्ने की तौल की जा रही है।