मुरादाबाद। महानगर के विकास के लिए बनी महायोजना 2021 पूरी होने वाली है, लेकिन बड़ी योजनाओं पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वहीं नई महायोजना 2031 को बनाने में भी देरी हो रही है। पिछली महायोजना के बड़े प्रोजेक्ट तक पूरे नहीं हो पाए। न रिंग रोड बन पाया, न सड़कें चौड़ी हुईं और न ही औद्योगिक क्षेत्र जैसी योजनाएं अमल में आईं।
महायोजना 2021 में बड़ी परियोजनाओं में सोनकपुर ओवरब्रिज नहीं बन पाया, वहीं दिल्ली रोड से कांठ रोड को मिलाने वाली रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण करने की कार्रवाई तक शुरू नहीं हो सकी। यातायात व्यवस्था ठीक करने के लिए बस अड्डों को बाहर करने और सड़कों के चौड़ीकरण की योजना पर भी काम शुरू नहीं हो सका। ग्रीन बेल्ट और पार्कों की स्थिति भी जस की तस है। सबसे बड़ा मुद्दा आवासीय क्षेत्र में उद्योग का था, जिसमें निर्यातक और उद्यमी वर्षों से औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की मांग करते रहे। महायोजना में भी इसे शामिल किया गया, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र बनाने की दिशा में भी काम नहीं हो सका।
ये होता तो बदल जाती शहर की तस्वीर
- पार्किंग व्यवस्था : बाजारों में बहुमंजिला पार्किंग की बात होती है, लेकिन सिर्फ योजना बनी रही। किसी भी बाजार में पार्किंग न होने से जाम की स्थिति भयावह रहती है।
- कांठ रोड मॉडल : कांठ रोड को मॉडल बनाना था। स्ट्रीट वेंडर, लाइटिंग, वॉल पेंटिंग, पार्क और ग्रीन बेल्ट आदि बनाकर इसे मॉडल बनाना था, लेकिन कोई काम नहीं हो सका।
- पिकनिक स्पॉट : एमडीए के पास एक सौ बीघे का विशाल पार्क है, जहां पिकनिक स्पॉट बन सकता है। इससे शहरवासियों को पिकनिक स्पॉट के साथ स्वच्छ हवा मिलेगी, लेकिन कोई काम नहीं हुआ।
अधिकारियों की शह पर फेल हो गई योजना
मुरादाबाद की महायोजना फेल होने के पीछे अधिकारियों की शह एक बड़ा कारण है। वजह है कि मनमर्जी से नक्शे पास किए गए। जिन मार्गों को चौड़ा करना था, उन पर कम चौड़ाई में ही नक्शे पास कर दिए गए। इसमें केवल एमडीए ही नहीं आवास विकास, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की वजह से अनियोजित विकास होता गया।
ऐसे तो नई महायोजना बनाने में लग सकते हैं छह माह
मुरादाबाद की महायोजना 2031 का काम इस बार नागपुर की निजी कंपनी को दिया गया। क्रिएटिव सर्किल कंपनी के विशेषज्ञ अभी सेटेलाइट से मिली महानगर की तस्वीरों को शीट्स पर उतारकर अपने डेटा से मिलान कर रही है। इसमें यह देखा जाता है कि शहर में किस स्थान पर क्या है और कहां से हाईवे निकल रहे हैं। अभी इतना काम बाकी है, जबकि महायोजना अब तक तैयार हो जानी चाहिए थी। इसे तैयारी करने में देरी की जा रही है। इस बार महायोजना के लिए दो सौ वर्ग किलोमीटर का मैप तैयार किया गया है। महायोजना के लिए सेटेलाइट्स से ली गई तस्वीरों में अभी 250 शीट्स पर काम हो रहा है, जबकि इसे 800 शीट्स पर तैयार किया जाना है। इसके बाद ब्लू प्रिंट एमडीए को सौंपा जाएगा। तब इसे बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद आपत्तियां ली जाएंगी, जिनका निस्तारण करने के बाद ही महायोजना बन सकेगी। इतना काम बाकी होने के कारण नई महायोजना बनने में छह माह और लग सकते हैं।
मार्च के बाद प्रभावित होगा नियोजित विकास
मार्च के अंत में महायोजना खत्म हो रही है। नई महायोजना का जिस तरह से काम हो रहा है, उससे हाल में यह नहीं तैयार हो पाएगी। ऐसे में भवनों के नक्शे किस तरह पास होंगे, यह समस्या सामने आएगी। इससे अवैध कॉलोनी बसती रहेंगी, जो नई महायोजना को भी प्रभावित करेंगी।
नई महायोजना बनाने में देरी हुई है, जिसके लिए महायोजना बना रही क्रिएटिव सर्किल कंपनी को पत्र भेजकर इसे समय से बनाने को कहा गया है। महायोजना बनाने में देरी करने का कारण भी पूछा है। यदि कोई ठोस कारण नहीं मिला तो शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
- सर्वेश कुमार गुप्ता, सचिव-एमडीए