महाविद्यालयों में सेमेस्टर प्रणाली लागू हो गई है। वर्ष में दो बार परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। एक सेमेस्टर में विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए न्यूनतम 90 दिन का समय होता है, लेकिन द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर वाले विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए एक भी दिन का समय नहीं मिला है। प्राचार्यों का कहना है कि नए सत्र के संचालन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से परीक्षाओं के दिन सीमित रखने के लिए अनुरोध करेंगे।
चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सौरभम कुमार पांडेय और छात्रा सादिया कौसर, द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा तनुश्री ने बताया कि दो मई को समाप्त हुईं विषम सेमेस्टर की उनकी परीक्षाओं का परिणाम विश्वविद्यालय ने 16 से 20 जून तक जारी किया था। इसी बीच 19 जून को विश्वविद्यालय ने द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षा फाॅर्म जारी कर दिए। बीच में अन्य परीक्षाएं चल रहीं थीं। इसकी वजह से हमारी पढ़ाई नहीं हुई।
एक परीक्षा कराने के बाद कॉलेज को सामान्य रूप से संचालन के लिए कम से कम 15 दिन का समय लग जाता है, लेकिन अभी परीक्षा, प्रयोगात्मक परीक्षा, अंकतालिकाओं का वितरण और दाखिला में ही शिक्षकों का पूरा समय बीत रहा है। विश्वविद्यालय से अनुरोध किया जाएगा कि सत्र को इस तरह से बनाया जाए, कि विद्यार्थियों को पढ़ने का समय मिल सके।- प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत, प्राचार्य, हिंदू कॉलेज
सेमेस्टर में पढ़ाई के लिए न्यूनतम 90 दिन का समय मिलना जरूरी है। अभी बच्चे जो कर रहे हैं, अपनी मेहनत से ही कर पा रहे हैं। पढ़ाई के लिए समय मिलना चाहिए। परीक्षाओं को शिड्यूल करने के लिए सभी प्राचार्य विश्वविद्यालय से इस दिशा में अनुरोध कर रहे हैं। - प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य, केजीके कॉलेज