शोले फिल्म में बुजुर्ग कलाकार एके हंगल का डायलॉग, जानते हो दुनिया का सबसे बड़ा बोझ क्या होता है? ...बाप के कंधों पर बेटे का जनाजा...इससे भारी बोझ कोई नहीं है। 60 वर्षीय नैपाल सिंह का दर्द, फिल्म के इस डायलॉग से भी कहीं ज्यादा है। नैपाल सिंह ने एक नहीं अपने दो जवान बेटों के जनाजों का बोझ अपने कंधों पर उठाया है। उन्होंने 11 साल में अपने दो जवान बेटे खो दिए।
बेटों के बारे में बताते-बताते नैपाल सिंह का गला रुंध गया और जुबान लड़खड़ाने लगी। कहते हैं कि छोटा बेटा परविंदर उर्फ बॉबी ठाकुर बहुत हंसमुख था। कभी किसी बात पर वह उदास दिखता था तो हमारी जान निकल जाती थी।
उसकी मां उसे समझातीं तो वह हंसने लगता था। कहता था कि मां आप घबराओ मत, जो गलती भैया ने की थी, वो मैं कभी नहीं कर सकता। इसके बावजूद उसने ऐसा कदम उठाया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।
नैपाल सिंह ने अपने घर की तीसरी मंजिल पर छोटे बेटे के कमरे का दरवाजा खोला तो उनकी आंखें डबडबा गईं। कमरे में बॉबी के होम थियेटर के स्पीकर, बॉडी बिल्डिंग के उसके सार्टिफिकेट, तस्वीरें लगी हुई थीं। अलमारी में दोनों बेटों के कपड़े आज भी सही से रखे हुए हैं।
अलमारी के नीचे के खाने में रखा गिटार देखकर पिता ने दुख से सिर पकड़ लिया। बोले कि छोटा बेटा बहुत जिद करके यह गिटार लाया था। खुद सीखकर अच्छा बजाने लगा था, ये गिटार भी उसकी अंगुलियों का इंतजार करता है।
नैपाल सिंह और उनकी पत्नी आत्महत्या शब्द सुनकर भी डर से जाते हैं। जिस कारण से उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी खो दी, उसका महज बातचीत से हल निकल सकता था। दोनों को इस बात का दुख है कि बेटों ने उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताया तक नहीं। अगर बात करते तो शायद आत्महत्या न करते।
पति-पत्नी लोगों से हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि परेशानी कैसी भी हो, बातचीत से उसे हल किया जा सकता है। अपने माता-पिता, करीबियों, दोस्तों से अपने दुख जरूर साझा करें, जिससे कोई मां-बाप ढलती उम्र में गम में न डूबें, अपनी किस्मत को न कोसें।