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UP: मक्का में जन्मे मौलाना आजाद बने थे रामपुर के पहले सांसद... आजादी के बाद बने थे देश के पहले शिक्षा मंत्री

Sat, 24 Feb 2024 01:28 PM IST
शाहरुख खान वाहिद अली, अमर उजाला, रामपुर

सार

रामपुर के पहले सांसद मक्का में जन्मे मौलाना आजाद बने थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से वो सांसद बनने के बाद देश के पहले शिक्षा मंत्री भी बने थे।
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Maulana Azad - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सऊदी अरब के मक्का में पैदा हुए देश के बड़े शिक्षाविद् मौलाना अबुल कलाम आजाद ने रामपुर की ऐतिहासिक धरती से राजनीतिक शुरुआत की थी। आजादी के बाद वो इस सीट से पहले सांसद बने और देश के पहले शिक्षा मंत्री भी बने। देश के बड़े शिक्षाविद् मौलाना आजाद 11 नवंबर 1888 को मक्का में पैदा हुए थे और 22 फरवरी 1958 के दिन उनका इंतकाल हुआ था।
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नवाबों की धरती रामपुर जिले का राजनीतिक और सांस्कृतिक लिहाज से एक अपना वजूद है। सन् 1774 से 1949 तक रामपुर में नवाबी शासन के बाद के एक और नई कड़ी जुड़ी। आजादी के बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद रामपुर लोकसभा सीट से पहले सांसद बनकर संसद पहुंचे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से वो सांसद बनने के बाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने। 

वे एक प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान थे। उन्होंने एमएयू के संस्थापक सर सैयद को आदर्श मानते हुए देश में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया। उन्होंने ग्यारह वर्षों तक राष्ट्र की शिक्षा नीति का मार्गदर्शन किया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना कराई। 
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उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को विकसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की। कवि, लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी रहे। वे महात्मा गांधी के सिद्धांतों का समर्थन करते थे। खिलाफत आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 

1923 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के प्रेसीडेंट बने, जबकि 1940 और 1945 के बीच भी कांग्रेस के प्रेसीडेंट रहे। 1952 में रामपुर लोकसभा सीट और 1957 में हरियाणा गुड़गांव लोकसभा से सांसद चुने गए। हालांकि यह कार्यकाल वे पूरा नहीं कर पाए और 1958 में उनका इंतकाल हो गया। उन्हें वर्ष 1992 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

 

34753 मतों के अंतर से जीते थे चुनाव
भारतीय सांस्कृतिक निधि रूहेलखंड के सह संयोजक काशिफ खां ने बताया कि पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से अबुल कलाम आजाद थे। जबकि एचएमएस यानी हिन्द मजदूर महासभा ने बिशन चंद्र सेठ को चुनावी समर में उतारा था। चुनाव में अबुल कलाम को 108180 वोट मिले थे। जबकि बिशन चंद्र सेठ को 73427 वोट मिले थे। इसमें 34753 मतों के अंतर से मौलाना अबुल कलाम आजाद चुनाव जीते थे।

तीन बार रामपुर आए थे आजाद
काशिफ ने बताया कि मौलाना आजाद महज तीन बार रामपुर आए। पहली बार चुनाव का नामांकन दाखिल किया। दूसरी बार जीत का प्रमाणपत्र लेने और तीसरी बार गांधी मैदान में सभा करने आए थे। उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद का रामपुर से सांसद बनना यहां के लिए सौभाग्य की बात थी। जो इतिहास के सुंदर अक्षरों में दर्ज है। रजा लाइब्रेरी में उनसे जुड़ीं किताबें आज भी उनका यादों को ताजा कर रहीं हैं, युवाओं को इन किताबों को पढ़ना चाहिए।

 

सऊदी अरब के मक्का शहर से उनका ताल्लुक
इतिहासकार बताते हैं कि मौलाना अबुल कलाम आजाद अफगान उलमाओं के खानदान से थे। जो बाबर के समय हेरात से भारत आए थे। उनकी मां अरबी मूल की थीं और उनके पिता मोहम्मद खैरुद्दीन एक फारसी थे। मोहम्मद खैरुद्दीन और उनके परिवार 1857 में भारतीय स्वतंत्रता के पहले आंदोलन के समय कोलकाता छोड़ कर सऊदी अरब के मक्का चले गए। 1888 में मौलाना कलाम आजाद का जन्म हुआ। जबकि वो 1890 में भारत लौट आए। मोहम्मद खैरूद्दीन को कोलकाता में एक मुस्लिम मौलाना विद्वान के रूप में ख्याति मिली।

 
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सऊदी अरब के मक्का शहर से उनका ताल्लुक
इतिहासकार बताते हैं कि मौलाना अबुल कलाम आकाद अफगान उलमाओं के खानदान से थे। जो बाबर के समय हेरात से भारत आए थे। उनकी मां अरबी मूल की थीं और उनके पिता मोहम्मद खैरुद्दीन एक फारसी थे। मोहम्मद खैरुद्दीन और उनके परिवार 1857 में भारतीय स्वतंत्रता के पहले आंदोलन के समय कलकत्ता छोड़ कर सऊदी अरब के मक्का चले गए, 1888 में मौलाना कलाम आजाद का जन्म हुआ। जबकि वो 1890 में भारत लौट आए। मौहम्मद खैरूद्दीन को कलकत्ता में एक मुस्लिम मौलाना विद्वान के रूप में ख्याति मिली।
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