संभल के छाबड़ा गांव में सात साल पहले ग्राम प्रधान शकुंतला, उनके पति विशम्बर सिंह और दो बेटे सुशील और सुनील की हत्या में दो सगे भाइयों समेत चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोषियों पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस सामूहिक हत्याकांड के छह आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए।
इस नरसंहार की चश्मदीद गवाह एवं प्रधान की बेटी रुचि ने नौ नवंबर 2016 को संभल के कुढ़फतेहगढ़ थाने में मां-पिता और दो भाइयों की गोली मारकर हत्या का मामला दर्ज कराया था। इसमें गांव के ही एक नाबालिग समेत 13 लोगों को नामजद किया गया था। बताया था कि आरोपियों के परिवार की महिला मंगलेश उनकी मां के मुकाबले प्रधानी का चुनाव लड़ी थी।
मां शकुंतला के चुनाव जीतने के बाद से यह परिवार रंजिश रखने लगा था। मंगलेश के पति महेश व उसके अन्य परिजनों ने नौ नवंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे घर पर धावा बोल दिया था। गोलियां बरसाकर चारों की हत्या कर दी थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या तीन सरोज यादव की अदालत में हुई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनीष भटनागर ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य आरोपी महेश, उसके भाई सुरेश, कृष्णपाल उर्फ केपी, विपिन उर्फ पवन को हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
सुनवाई के दौरान आरोपी पिता-पुत्र की हो चुकी है मौत
इस सामूहिक हत्याकांड के 13 आरोपियों में से तालेवर और उसके बेटे गुड्डू की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। नाबालिग होने के कारण एक आरोपी की फाइल अलग कर दी गई है। यह फाइल किशोर बोर्ड भेज दी गई है। सामूहिक हत्याकांड में आरोपी रहे गोविंदा, दुष्यंत, अमन, प्रियंका, विपिन, डबलू साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त हो गए।
प्रधान की दो बेटियों की गवाही बनी सजा का आधार
सामूहिक हत्याकांड में प्रधान की दोनों बेटी रुचि और सुरुचि की गवाही सजा दिलाने में अहम रही। वारदात के समय घर में मौजूद दोनों बहनों ने अदालत में हाजिर होकर नरसंहार की आंखों देखी बताई थी।