मुरादाबाद। काम का तनाव, अनियमित दिनचर्या, कम होती शारीरिक गतिविधियां और फास्ट फूड का बढ़ता सेवन लोगों में मोटापे का कारण बन रहा है। आईसीएमआर के आंकड़ों के अनुसार 50 प्रतिशत युवा मोटापे के शिकंजे में हैं। जिले की बात करें तो 35 लाख की आबादी में हर चौथे आदमी का बॉडी मास इंडेक्स 25 से ज्यादा है।
जिला अस्पताल में पिछले 31 दिन में लगभग 45 हजार लोग ओपीडी में पहुंचे। इनमें से 13009 मरीजों में शुगर, हाईपरटेंशन व फैटी लिवर की पुष्टि हुई है। यह बीमारियां बढ़ते मोटापे की ओर इशारा करती हैं। यह मरीज 35 से 75 आयु वर्ग के हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में देशवासियों में बढ़ते मोटापे को लेकर चिंता जाहिर की। साथ ही लोगों से मोटापे के विरुद्ध अभियान में शामिल होने की अपील की। मोटापे के खिलाफ लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से अमर उजाला भी ''मुसीबत बना मोटापा'' नाम से एक अभियान शुरू कर रहा है। इसमें लोगों को मोटापे के कारणों के साथ ही मोटापा कम करने के उपाय भी बताए जाएंगे। साथ ही ऐसे लोगों से बातचीत कर उनके अनुभव भी प्रकाशित किए जाएंगे, जिन्होंने मोटापे पर जीत हासिल कर खुद को स्वस्थ बनाया। आज प्रस्तुत है पहली कड़ी...।
जिले में करीब 400 पंजीकृत डॉक्टर हैं। इनमें 20 कार्डियोलॉजिस्ट, 50 फिजीशियन, 10 न्यूरो साइकाइट्रिस्ट और पांच यूरोलॉजिस्ट व नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। इन सबकी ओपीडी का आंकड़ा कहता है कि हर चौथा व्यक्ति ज्यादा वजन व मोटापे की समस्या से जूझ रहा है। हर महीने 1000 से ज्यादा नए मरीजों में शुगर, ब्लड प्रेशर, किडनी व लीवर की बीमारियों का पता चल रहा है।
जंक फूड, स्मार्ट फोन, पैदल न चलना, पसीना न बहाना, कम नींद और तनाव यह सब मोटापा बढ़ाने के कारण हैं। डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना के बाद लोगों में तेजी से मोटापे के कारण होने वाली बीमारियां बढ़ी हैं। मुरादाबाद में ही बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले सामने आए हैं। लोगों में मेटाबॉलिक डिसऑर्डर इस तरह बढ़ गए हैं कि 20 से 30 की उम्र वाले लोगों को भी हार्ट अटैक आ रहा है। वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग मेहरोत्रा कहते हैं कि मोटापा एपिडेमिक यानी महामारी बन गया है। इसकी वजह से जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं, जो हर साल तमाम लोगों की जान ले रही हैं।
हड्डियां कमजोर होने से लेकर बांझपन तक का खतरा
ऑर्थोपेडिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. नजमुल हुदा कहते हैं कि मोटे लोगों की हड्डियां जल्दी कमजोर हो जाती हैं। मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के कारण जोड़ों का दर्द और गठिया जैसी बीमारी के मरीज ओपीडी में आते हैं। वहीं मुरादाबाद ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनीकोलॉजी सोसायटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मनीषा जैन का कहना है कि मोटापे के कारण प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। महिलाओं को शुगर का खतरा रहता है। इससे भ्रूण प्रभावित होता है और बार-बार गर्भपात का खतरा रहता है।
25 से ऊपर बीएमआई खतरे की घंटी
डॉक्टरों के मुताबिक हर व्यक्ति का लंबाई और वजन का अनुपात बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) कहलाता है। यदि बीएमआई 25 से ऊपर है तो खतरे की घंटी है और व्यक्ति ज्यादा वजन वाली श्रेणी में आता है। बीएमआई 30 से ऊपर होने पर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। जैसे-जैसे बीएमआई बढ़ता है उसके साथ बीमारियां भी गंभीर होती जाती हैं। इंटरनेट की मदद से अपना बीएमआई आसानी से जांच सकते हैं। 18.5 और 24.9 के बीच का बीएमआई स्वस्थ वजन की श्रेणी में आता है।
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मोटापे के कारण
- जंक और प्रोसेस्ड फूड
- पैदल न चलना
- सात घंटे से कम नींद लेना
- ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताना
- चीनी, मैदा और तैलीय पदार्थों का सेवन
- दवाएं व अनुवांशिकता
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दिनचर्या में बदलाव से हारेगा मोटापा
- सोने, जागने व खाने का समय तय करें
- रोजाना 30 मिनट तक तेज चाल से पैदल चलें
- डाइट में सलाद व फल बढ़ाएं, बाकी चीजें कम करें
- रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लें
- एसी, हीटर में रहने से बचें
क्या कहते हैं डॉक्टर
बच्चों की रुचि डिजिटल गेमिंग की बजाय मैदान के खेलों की तरफ होनी चाहिए। इसके लिए माता-पिता को प्रयास करने होंगे। आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती आने वाली पीढ़ी को मोटापे, शुगर व ब्लड प्रेशर से बचाने की है। - डॉ. सौभाग्य मिश्रा, फिजीशियन
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कम उम्र में दिल की बीमारियां होने का बड़ा कारण मोटापा भी है। तनाव, शराब, कम नींद यह सब मोटापे के साथ कार्डियोवस्कुलर डिजीज को दावत देते हैैं। 25 साल के युवाओं की एंजियोप्लास्टी करता हूं तो भावी पीढ़ी की चिंता होने लगती है। - डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, कार्डियोलॉजिस्ट
मोबाइल के कारण शारीरिक गतिविधि न करने से बच्चों में मोटापे व शुगर के मामले मेरी ओपीडी में आए हैं। 12 साल के बच्चे का वजन 90 किलोग्राम था। कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बहुत खराब था। इसे नजीर की तरह लेना चाहिए और मोबाइल से ज्यादा बच्चों को मैदान में समय बिताना सिखाना चाहिए। - डॉ. एसएम रजी, एंडोक्रोनोलॉजिस्ट