मुरादाबाद। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत आज (शुक्रवार) से हो रही है। कोरोना संक्रमण काल में दो वर्ष तक घरों में बंद रहकर मायूस हुए विद्यार्थियों के चेहरे की रौनक लौटने लगी है। गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने की कवायद की जा रही है। छोटे-छोटे विद्यार्थी गीत के माध्यम से गणित सीख रहे हैं।
नए सत्र में विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए शिक्षक भी उन्हें खेल व अन्य प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करवाकर उनकी खुशियां लौटा रहे हैं। स्थिति यह है कि अब विद्यार्थी नए सत्र में नियमित स्कूल आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आकांक्षा विद्यापीठ इंटर कालेज के प्रधानाचार्य हिमांशु यादव ने बताया कि विद्यार्थी स्कूल खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दो वर्षों तक घरों में रहने के बाद अब वह खुला माहौल चाहते हैं। अपने दोस्तों और शिक्षिकाओं के साथ समय बिताना पसंद कर रहे हैं। जिन विद्यार्थियों का घर में किसी काम में मन नहीं लगता था, अब वह गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग करते हैं।
हर क्लास में पांच मिनट का ध्यान जरूरी
गांधी नगर पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य शशि सिंह ने बताया कि वह विद्यार्थियों को कोरोना के तनाव से दूर रखने का पूरा प्रयास कर रही हैं। इसके लिए प्रत्येक क्लास की शुरुआत में पांच मिनट ध्यान लगवाया जाता है, ताकि वह पढ़ाई के लिए पूरी तरह एकाग्र हो जाएं। इसके अलावा छोटे विद्यार्थियों को संगीत के माध्यम से गणित की गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वह खेल-खेल में जोड़-घटाना, गुणा-भाग आदि सीख रहे हैं। गिनती और पहाड़े भी वह गीत-संगीत के माध्यम से ही सीख रहे हैं। जब अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए आते हैं तो वह उनको हंसता हुआ देखकर बहुत खुश होते हैं।
आनलाइन क्लास के बाद अब ऑफलाइन माध्यम से पढ़ाई करना बहुत अच्छा लग रहा है। आनलाइन पढ़ाई में कभी नेटवर्क नहीं आता था तो कभी फोन की बैटरी बैकअप की वजह से क्लास अधूरी रह जाती थी। अब मैं प्रतिदिन स्कूल आने का इंतजार करता हूं।
हर्षित, छात्र
आनलाइन पढ़ाई के दौरान बहुत से टॉपिक समझ में नहीं आते थे। इसलिए मैं प्रतिदिन स्कूल आकर पढ़ाई करना चाहती हूं। स्कूल में होने वाली गतिविधियों से तनाव दूर होता है और पढ़ाई में भी मन लग रहा है।
कशिश, छात्रा
ऑफलाइन माध्यम से जब पढ़ाई होती है तो विद्यार्थियों की प्रत्येक गतिविधि पर शिक्षकों की नजर रहती है। अनुशासन बच्चे स्कूल में आकर ही सीखते हैं। अपनी समस्याओं का समाधान भी वह प्रभावी रूप से कक्षा में बैठने के बाद ही करवा पाते हैं। इसलिए अब नियमित स्कूल खुलने चाहिए।
मोहम्मद नजीब सैफी, अभिभावक
विद्यार्थियों के विकास के लिए सांस्कृतिक गतिविधियां और शारीरिक व्यायाम भी बहुत आवश्यक है। यह चीजें व्यवस्थित तरीके से स्कूल में ही संभव हैं। शिक्षक हमसे भी सुझाव मांगते हैं। मेरा यही मानना है कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करवाते हुए अब ऑफलाइन कक्षाओं का संचालन बहुत जरूरी है।
रुपिंदर सिंह, अभिभावक