सीमा पर पाकिस्तान की गोलाबारी आज भी कर देती है बेचैन
कैप्टन अखिलेश सक्सेना ने बताया कि कारगिल युद्ध में वहां की परिस्थितियां बहुत विषम थीं। दुश्मन ऊंची चोटियों पर बैठे थे और भारतीय सैनिकों को नीचे से ऊपर जाकर लड़ना पड़ता था। ऐसे में भारतीय सैनिकों को दुश्मनों को मार गिराने में काफी परेशानी उठानी पड़ती थी।
बावजूद वह अपनी टुकड़ी के साथ निरंतर चढ़ाई करते गए और आगे बढ़ते रहे, वहां करो या मरो की स्थिति बनी रहती थी। उन्होंने बताया कि दो जुलाई को देर रात करीब तीन बजे तोलोलिंग चौकी को पाकिस्तानी घुसपैठियों से मुक्त कराकर आगे कूच करने के लिए सैनिकों को निर्देशित कर रहे थे।
उसी समय दुश्मन की तीन गोलियां उनके हाथों में लगीं, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बराबर मोर्चा संभाले रखा। उन्होंने ब्लैक रॉक पर तिरंगा फहराया था। उन्होंने बताया कि सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से होने वाली गोलीबारी आज भी उन्हें बेचैन कर देती है।
युद्ध शुरू होने के दो महीने बाद आई थी चिट्ठी
कैप्टन के पिता एडवोकेट सीपी सक्सेना ने बताया कि बेटे की चिट्ठी युद्ध शुरू होने के दो महीने बाद आई थी। चिट्ठी में लिखा था कि मम्मी-पापा भारत और पाकिस्तान का युद्ध शुरू हो गया है। मैं युद्ध में जा रहा हूं, पता नहीं क्या होगा। मैं जो भी करने जा रहा हूं, देश के लिए करने जा रहा हूं। चिट्ठी मिलने पर परिजन बेचैन हुए, लेकिन सभी को बेटे पर गर्व है।