यूक्रेन में फंसे जिले के सात एमबीबीएस के छात्रों समेत 11 लोगों के परिजन उनकी सलामती जानने में लगे रहे। छोटा बैग पैक कर छात्र देश वापसी को तैयार हैं। छात्रों को ट्रांसपोर्ट और अपने खर्च के लिए 300 डॉलर रखने को गया गया है। वहीं, यूक्रेन में छात्रों के समक्ष खाने का संकट गहराने लगा है, जिसे लेकर छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
टर्नोपिल में एमबीबीएस के छात्र देहरी गांव निवासी सजल सरकार, चक्कर की मिलक निवासी अमान, वीन्नित्स्या में अवंतिका कॉलोनी निमिष सक्सेना, रामगंगा विहार फेस वन निवासी देवांश जौहरी पुत्र राकेश जौहरी, पाकबड़ा के नगला बलवीर निवासी मोहम्मद फैज यूक्रेन में फंसे हैं। छात्रों के परिजनों के मुताबिक शुक्रवार सुबह साढ़े चार बजे तीन बार सायरन बजाकर छात्रों को बंकर में भेज दिया गया। करीब डेढ़ घंटे छात्रों को बंकर में रखा गया। इसके बाद सभी हॉस्टल भेज दिया गया।
आज छात्रों के निकलने की उम्मीद
यूक्रेन के टर्नोपिल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे मंगूपुरा निवासी मोहम्मद अरहम के पिता शाकिर हुसैन ने बताया कि शुक्रवार को कुछ छात्र वहां से निकले हैं। अरहम भी निकलना चाह रहा था। बिना एंबेसी के इजाजत के उसे निकलने से मना कर दिया गया है। छात्रों को एक छोटा बैग पैक कर तैयार रहने को कहा गया था। साथ ही तीन सौ डॉलर भी रखने का कहा गया है। 200 डॉलर ट्रांसपोर्ट खर्च और 100 डॉलर अपने खर्च के लिए रखना होगा। शनिवार को बसें आएंगी तो छात्रों को निकाला जाएगा।
बात करके मिल रही तसल्ली, हर घंटे बदल रहा प्रोग्राम
अवंतिका कॉलोनी निवासी प्रदीप सक्सेना ने बताया कि यूक्रेन में फंसे बेटे निमिष से लगातार वीडियो कॉलिंग पर बात हो रही है। बात करके उसका हाल जान दिल को तसल्ली मिल रही है। सुबह तीन बार सायरन बजाय गए। इसके बाद छात्र बेसमेंट (बंकर) में चले गए। यहां डेढ़ घंटे छात्रों को रखा गया। छात्रों को हंगरी के रास्ते भारत लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्टेशन के पास बस लगाई गई है। बेटे ने बताया कि यहां हर घंटे प्रोग्राम बदल रहा है। उसके अनुसार ही तैयारी की जा रही है।
20 से 25 किमी पैदल चलकर पहुंच रहे एयरपोर्ट
टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र पाकबड़ा के गांव नंगला बलवीर निवासी मोहम्मद फैज ने बताया कि यूक्रेन सरकार ने अपने घरों और हॉस्टल की लाइट जलाने ं पर पाबंदी लगा दी है। विवि के डॉयरेक्टर ने बताया कि सभी को बारी बारी से भेजा जाएगा। पहले सीनियर को भेज रहे हैं। बसों को बॉर्डर से आगे जाने नहीं दिया जा रहा है। बॉर्डर से 20 से 25 किमी पैदल चलकर एयरपोर्ट पहुंचना पड़ रहा है। खतरा लगातार बना हुआ है।