संभल। गैर संचारी रोगों की जांच और उपचार के लिए जिले में स्थापित 102 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स खुद बीमार हैं। इनमें से आधे से अधिक सेंटर्स पर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इन पर ताला लटका रहता है। कहीं भवन जर्जर हालत में है, तो कहीं ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर लिया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि कोरोना काल के दौरान 35 और सेंटर्स का निर्माण कराया गया था। अभी वह सेंटर्स हैंडओवर नहीं हुए हैं, जिसके चलते वह बंद हैं। 102 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर क्रियाशील हैं।
नगर से सटे मंडी किशनदास सराय में बना हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खुद बीमार है। इस सेंटर की हालत बेहद जर्जर है। हैंडपंप लगा है, लेकिन वह खराब है। लोगों को पानी मिलना तो दूर की बात है। सेंटर में तैनात सीएचओ को भी पानी साथ लाना पड़ता है। दवाइयों की भी उपलब्धता सही नहीं है। यह जानकारी सीएचओ ने खुद दी है। सेंटर की छत भी जर्जर हो गई है, जिससे हर समय खतरा बना रहता है।
उधर, पवांसा ब्लॉक क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का छह महीने पूर्व ऑनलाइन उद्घाटन किया था, जिसमें चार गांव में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का निर्माण हुआ और 6 गांवों में किराए के भवन में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर चलाने का दावा किया गया। हकीकत यह है कि अतरासी में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से ही ताले लटके हुए हैं। अब ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर लिया है। रसूलपुर धतरा में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का निर्माण कार्य कई महीने पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक संचालित नहीं हो सका। बहजोई ब्लॉक के गांव किरारी में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का निर्माण कार्य तीन वर्ष पहले हुआ, जो अब बिना सेवाएं दिए ही जर्जर हो गया है।
दो साल पहले कोरोना शुरू होने पर बंद कर दी गईं थीं सुविधाएं
102 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर कम्यूनिटी हेल्थ अधिकारियों की तैनाती थी। कोविड महामारी का दौर शुरू हुआ तो यहां पर सुविधाएं मिलना बंद हो गईं थीं। अब हालात सामान्य हैं लेकिन सुविधाएं अब तक असामान्य हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेेंटर स्थापित करने के पीछे शासन की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उनके घर के नजदीक सामान्य बीमारियों की जांच एवं दवा उपलब्ध कराने के साथ ही गैर संचारी रोग जिसमें शुगर, उच्च रक्त चाप, मुख, गर्भाशय एवं स्तन कैंसर भी शामिल है आदि की जांच हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, जिसके चलते लोग परेशान हैं।
हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर बनकर तैयार हो गया है, लेकिन चिकित्साकर्मी की तैनाती नहीं की गई है। कई बार इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से की, बावजूद इसके तैनाती नहीं हो पाई। जिस कारण लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
बाबू सिंह, ग्राम प्रधान, रसूलपुर धतरा।
हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर बनाने के लिए सरकार ने लाखों खर्च किए। बने हुए भी चार साल बीत गए, लेकिन ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं कब मिलेगी इसकी जानकारी नहीं है। ग्रामीणों ने अब अवैध कब्जा कर लिया है। उपचार कराने के लिए बहजोई और संभल जाना पड़ता है।
महेश यादव, अतरासी
हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का छह महीने पूर्व मुख्यमंत्री के द्वारा उद्घाटन किया गया, लेकिन निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है। किराए के भवन में सेंटर संचालित है पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन समाधान नहीं हुआ।
विजेंद्र पाल, सैंजना
कोरोना काल में 35 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स और बनाए गए थे। वह कार्यदायी संस्था की ओर से हैंडओवर नहीं किए गए हैं। जब तक हैंडओवर नहीं किए जाएंगे तब तक स्वास्थ्य विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है। वही सेंटर्स बंद है।
डॉ. मनोज चौधरी, प्रभारी, सीएचसी पवांसा