पीएम मोदी ने परिवर्तन महारैली में साफ कर दिया कि सरकार ज्यादा नोट छापकर कालेधन को फिर बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने भारतवासियों की बदलाव स्वीकारने की आदत की तारीफ करने के साथ अपील भी की कि अब कैशलेस सिस्टम को आत्मसात कर लें।
मोदी के इस रुख से मुरादाबाद वासी चिंतित हैं। एक- एक कर 50 दिन गिन रहे लोगों के जेहन में तमाम सवाल उमड़ पड़े हैं। वे नहीं समझ पा रहे हैं कि 40 करोड़ स्मार्ट फोन वालों के अलावा करीब 85 करोड़ की आम जनता हाट - बाजार - मंडियों के साथ छोटे - मोटे लेनदेन कैशलेस कैसे करेगी। यानी मुसीबत 25 दिन बाद भी बरकरार रहने वाली है। मुरादाबाद वासियों की इस चिंता पर क्या कहते हैं अर्थशास्त्र के जानकार... पेश है एक रिपोर्ट
छह माह तक पब्लिक को झेलनी होगी परेशानी: डा. कविता
मुरादाबाद। गोकुलदास हिंदू गर्ल्स डिग्री कालेज की अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्ष डा. कविता भटनागर कहती हैं कि पब्लिक को कम से कम छह माह तक परेशानी झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। लेेकिन छह माह बाद अर्थव्यवस्था में जान पड़ेगी और देश विकास की गति पर दौड़ेगा। लेकिन ये जरूरी है कि पब्लिक कैश के बजाए प्लास्टिक मनी (ऑनलाइन पेमेंट, क्रेडिट कार्ड) की आदत डाल ले। जो लोग ऐसा नहीं करेंगे उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। सरकार को गांव - देहात में ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाकर लोगों को इसके लिए ट्रेंड भी करना चाहिए।
कैशलेस की आदत डालें नहीं तो होगी परेशानी: डा. पूनम
मुरादाबाद। दयानंद गर्ल्स डिग्री कालेज की अर्थ शास्त्र की एसोसिएट प्रोफेसर डा. पूनम बंसल कहती हैं कि जितनी करेंसी बाजार में कम आएगी उतना ही कालाधन भी कम जमा होगा। इससे भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी। लेकिन यदि लोगों ने प्लास्टिक मनी की आदत नहीं डाली तो उन्हें परेशानी झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। नोटबंदी और करेंसी की कमी फिलहाल अर्थव्यवस्था में स्थिलता लाएगी लेकिन इसके दूरगामी नतीजे अच्छे होंगे। सरकार को अब टैक्स कम करके पब्लिक को राहत देनी चाहिए।
जहां क्रेडिट कार्ड चले वहां कैश न दें
मुरादाबाद। अर्थशास्त्र के जानकार कहते हैं कि कोशिश करें कि जहां क्रेडिट कार्ड से पेमेंट हो सकता है वहां कैश न दें। क्रेडिट कार्ड से ही भुगतान करें। तमाम सरकारी बिलों का भुगतान भी अब ऑनलाइन करने की सुविधा है। स्कूल की फीस लेकर घर के राशन तक के लिए तमाम शापिंग कांप्लेक्स और छोटी दुकानों तक पर स्वैप मशीन उपलब्ध हैं।