मुरादाबाद। रेल मंडल में गार्ड के तकरीबन 400 पद खाली हैं। मुरादाबाद मंडल से हर दिन 120 से ज्यादा मालगाड़ियां गुजर रही हैं। प्रत्येक मालगाड़ी में गार्ड की तैनाती नहीं हो पा रही है। गाड़ियां बिना गार्ड के चलाई जा रही हैं। जोकि संरक्षा की दृष्टि से गलत है। रेलवे का तर्क है कि मालगाड़ियों में ईटीओटी (एंड ऑफ ट्रेन टेलीमेट्री) डिवाइस लगाई जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि कुछ मालगाड़ियों में यह डिवाइस नहीं लगी है।
रेलवे को सबसे अधिक राजस्व देने वालीं मालगाड़ियों के सुचारु रूप से संचालन में गार्ड की अहम भूमिका रहती है। मालगाड़ी के पीछे लगने वाले ब्रेकवान में मौजूद गार्ड को संचालन के हर गतिरोध पर नजर रखनी पड़ती है। हर स्टेशन पर सिग्नल एक्सचेंज कराना, वैगनों में कोई गड़बड़ी दिखने पर ड्राइवर को सूचित करना, हैंड ब्रेक लगाकर गाड़ी की गति को धीमा करना, खतरा भांपना, लूप लाइन में मालगाड़ी को खड़ा करते वक्त कोई डिब्बा दूसरी लाइन पर तो नहीं, दूसरी लाइन से गुजर रही ट्रेन का ध्यान रखना समेत कई महत्वपूर्ण काम करने पड़ते हैं। ऐसे में मालगाड़ियों में गार्ड की तैनाती न होना संरक्षा के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। रविवार को मुरादाबाद स्टेशन से गुजर रही एक मालगाड़ी के केबिन में न तो गार्ड तैनात था, न ही किसी प्रकार की डिवाइस लगी थी। मुरादाबाद रेल मंडल में गार्डों के कुल 1085 पद हैं। इनमें से वर्तमान में 490 गार्ड ही तैनात हैं। कर्मचारी संगठनों की भी मांग है कि रेलवे को रिक्त पदों पर भर्ती करनी चाहिए।
क्या कहते हैं रेलवे के नियम
1- सिवाय आपात काल के कोई भी गाड़ी बिना गार्ड के नहीं चलाई जाएगी।
2- आपात काल में वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक या मंडल परिचालन प्रबंधक की पूर्व अनुमति से केवल दिन के समय बिना गार्ड के मालगाड़ी का संचालन किया जा सकता है।
3- ऐसी परिस्थिति में एक ‘ग’ श्रेणी का सक्षम रेल कर्मचारी गार्ड के कर्तव्यों को निभाने के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए। जिसके पास गाड़ी के संरक्षित संचालन और बचाव संबंधी उपकरण जैसे- पटाखा सिग्नल, ट्राई कलर हैंड सिगनल लैंप, लाल व हरी झंडियां, ड्राई सेल टॉर्च आदि होंगे।
4- ऐसी गाड़ियों के संचालन संबंधी अलग से एक रजिस्टर कंट्रोल कार्यालय में रखा जाएगा।