फजीहत के बाद ही सही प्रशासन को अजुध्या शुगर मिल के मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी ही पड़ी। अजुध्या शुगर मिल के गोदामों से प्रशासन द्वारा कुर्क की जा चुकी 1.21 लाख कुंतल चीनी गायब होने के मामले में बिलारी तहसील के संग्रह अमीन ने अब मिल के मालिकों राणा वीर प्रताप सिंह, इंदर प्रताप सिंह और राणा कर्ण प्रताप सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ बिलारी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इससे पहले तहसीलदार ने इसी मामले में सिर्फ मिल के डीजीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर मिल मालिकों को बख्श दिया था।
बिलारी में सहसपुर स्थित राणा ग्रुप की अजुध्या शुगर मिल के खिलाफ प्रशासन द्वारा 20 मई 2015 को 47.04 करोड़ रुपये की आरसी जारी की गई थी। जिसके बाद चार सितंबर 2015 को मिल के दोनों गोदामों में मौजूद एक लाख 32 हजार 118 बोरा चीनी को कुर्क करके गोदामों को सील कर दिया गया था। ये चीनी बेचकर किसानों का पेमेंट होना था। लेकिन 27 मई 2016 को गोदाम खुले तो 1.21 लाख बोरा चीनी गायब थी।
डीएम जुहैर बिन सगीर ने इस मामले में मिल मालिकों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। लेकिन तहसीलदार बिलारी वीके कुशवाहा ने महज मिल के डीजीएम उदयराम शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर बाकी सभी को बख्श दिया था। डीएम पांच लोगों पर रिपोर्ट का दावा करते रहे लेकिन पुलिस रिकार्ड में बस एक ही अभियुक्त था।
‘अमर उजाला’ रिपोर्ट पर तहसीलदार के झूठ को उजागर किया तो गुरुवार को संग्रह अमीन चंद्रपाल सिंह ने नई तहरीर देकर बिलारी थाने में अजुध्या शुगर मिल के मालिकों राणा वीर प्रताप सिंह, राणा इंदर प्रताप सिंह और राणा कर्ण प्रताप सिंह समेत सेल्स आफिसर विवेक अहलावत व डीजीएम उदयराम शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी व अमानत में खयानत की दूसरी रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
जाट महासभा ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की मांग उठाई
बिलारी। अखिल भारतीय जाट महासभा बिलारी ने भी स्थानीय अजुध्या शुगर मिल पर बकाया गन्ना मूल्य का शीघ्र भुगतान मिलने और सील हुए गोदामाें से चीनी गायब करने के आरोपी मिल अधिकारियाें के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जाट महासभा बिलारी के तहसील अध्यक्ष चौधरी भूरे सिंह फौजी ने बताया कि किसानों का बकाया मूल्य जल्द नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।