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आंखें खोली, पर महिला टीचर का जीवन अभी खतरे में 

Fri, 03 Jun 2016 10:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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मॉक ड्रिल हादसा
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आरआरके स्कूल में सिविल डिफेंस वालों की लापरवाही का शिकार हुईं टीचर श्रद्धा शर्मा अभी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। उनके लिए अगले तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके सिर की चोट के साथ ही फीमर हड्डी के लिहाज से भी डाक्टर तीन दिन सकुशल गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। गुरुवार को टीचर ने आंखें खोली और अपनों को पहचाना भी, लेकिन उनकी हालत अभी खतरे से बाहर नहीं है। 
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शिक्षिका श्रद्धा शर्मा की हालत में कुछ सुधार आया है। गुरुवार को उन्होंने आंखें खोली। उनकी हालत में सुधार को देखते हुए डाक्टरों ने उन्हें हल्का फूड (चाय बिस्किट) दिया। टीचर ने परिवार वालों को पहचाना भी । उनकी हालत में सुधार के बावजूद डाक्टर उनकी स्थिति पर स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। डाक्टरों के अनुसार फोर हैड इंजरी के लिए 48 घंटे क्रिटिकल होते हैं। जिसमें पहले 24 घंटे का समय सुरक्षित निकल गए और उनकी हालत में सुधार भी हुआ। अभी भी 24 घंटे सही सलामत बीतने का इंतजार है। इसके साथ ही पैर की हड्डी फीमर टूटने से भी खतरा बना हुआ है।

शरीर की सबसे बड़ी हड्डी के टूटने पर जीवन पर खतरा बना रहता है। डाक्टरों के अनुसार फीमर टूटने से तीन दिन तक जोखिम रहता है। कारण कि हड्डी में होने वाला ब्लड सर्कुलेशन कभी कभी हार्ट की ओर बैक हो जाता है। ऐसे में जान का खतरा बढ़ जाता है। अभी दो दिन और बीतने के बाद ही उनकी सर्जरी हो पाएगी। तब तक दवाओं से उपचार होगा। डाक्टरों के लिए राहत की सबसे बड़ी बात ये है कि खून के थक्के बढ़े नहीं हैं। 
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नियमों को ताक पर रख लटका दिया तीसरी मंजिल से

ये कोई अनायास ही घटा हादसा नहीं बल्कि सिविल डिफेंस वालों की घोर लापरवाही का नतीजा था। आपदा से बचने के गुर सिखाने वालों ने इतने अनाड़ी तरीके से मॉक ड्रिल कराई कि टीचर की जान ही खतरे  में पड़ गई। आरआरके स्कूल में कराई गई माक ड्रिल में नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। छत से घायलों का उतारने का जो तरीका अपनाया गया वह सिविल डिफेंस के मैन्युअल में है ही नहीं। सबसे बड़ी बात ये कि पूरी माक ड्रिल में सिविल डिफेंस का कोई भी सीनियर अधिकारी मौजूद नहीं था।

ये तथ्य उप नियंत्रक सिविल डिफेंस बरेली ने अपनी जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में दिए हैं।  घटना के बाद सिविल डिफेंस मुख्यालय ने कश्मीर सिंह उप नियंत्रक बरेली को जांच कर आख्या देने का आदेश दिया। जांच के बाद उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरती गई है। सबसे पहला तो मॉक ड्रिल में सिविल डिफेंस का कोई सीनियर अधिकारी मौजूद नहीं था। जिन उपकरण के साथ काम किया जा रहा था वह अपर्याप्त थे। हर मॉक ड्रिल के लिए गाइड लाइन निर्धारित हैं।

आपदा में फंसे लोगों को निकालने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया वह मैन्युअल में ही नहीं है। मैंने वीडियो भी देखा उसमें भी लापरवाही साफ दिखाई दे रही है। शिक्षिका को उतारने के लिए सुरक्षा के मानकों को ध्यान नहीं रखा गया। उन्हें हेलमेट भी नहीं पहनाया गया, दूसरा एक रस्सी के सहारे उतारा। इस प्रकार से हादसे की संभावना बढ़ जाती है। यह तरीका रेलवे के सिविल डिफेंस में प्रयोग किया जाता है। जांच अधिकारी ने बताया कि उन्होेेंने शिक्षिकाओं के अलावा सिविल डिफेंस के वालेंटियर से बात की। 

क्या अपनाया जाना चाहिए था तरीका 
इस तरह की मॉक ड्रिल में दो रस्सी का सहारा लिया जाता है। ताकि एक रस्सी टूट भी जाए तो वालेंटियर नीचे नहीं गिरे।
दूसरी रस्सी को स्ट्रेचर नुमा पर्दे से जोड़ा जाता है। इसकी वजह ये है रस्सी टूटने पर वालेंटियर सीधे पर्दे पर आ जाए और हादसा ना हो।
मॉक ड्रिल के वक्त वालेंटियर को हेल्मेट जरूरी तौर पर पहनाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
मॉक ड्रिल के वक्त नीचे गद्दे भी बिछाए जाते हैं ताकि किसी प्रकार का हादसा होने पर ज्यादा चोट न लगे।


छुट्टी पर चल रही हैं उप नियंत्रक 
मुरादाबाद। मुरादाबाद में उप नियंत्रक की तैनाती पिछले महीने ही हुई है। अनीता प्रसाद ने उप नियंत्रक के तौर पर उन्होंने आठ मई को ज्वाइन किया था। इसके बाद वे लगातार छुट्टी पर चल रही है। उनकी गैर मौजूदगी में इतनी महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल करा दी गई। सिविल डिफेंस की ओर से भी पूरा स्टाफ नहीं था। मॉक ड्रिल के समय के सहायक उप नियंत्रक ही मौजूद रहे। 
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