मुरादाबाद। बदहाली से खतरनाक हालात तक पहुंचे ये रास्ते देखकर आप यकीन नहीं करेंगे कि इनसे ही गुजरकर छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां अपनी पाठशाला तक का सफर तय करते हैं। वही नौनिहाल, जिनसे हमारे-आपके ही नहीं देश के सपने भी जुड़े हैं। माता-पिता अपनी संतान का भविष्य बेहतर बनाने की उम्मीद से स्कूल तो भेजते हैं लेकिन इनके घर लौटने तक मन में धुकुर-पुकुर रहती है। घबराए रहते हैं कि बच्चे स्कूल और घर के बीच हादसे की चपेट में न आ जाएं।
बात सिर्फ बच्चों तक ही सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी इन खतरनाक रास्तों को पार करने का इम्तिहान हर बरसात में देना पड़ता है। कल्पना की जा सकती है कि इन रास्तों का इस्तेमाल करने वाले बच्चे और शिक्षकों के कपड़े-जूतों का क्या हाल होता होगा। इसी हाल में किन स्थितियों में पहुंच जाते होंगे। वैसे हालात में बैठकर ही उन्हें पढ़ने-पढ़ाने का क्रम पूरा करना कितना कठिन होगा।
हैरानी इस बात की है कि खुलेआम नजर आने वाली इन अव्यवस्थाओं से ग्राम पंचायत स्तर की इकाई से लेकर जनपद स्तरीय अधिकारी बेखबर हैं। इन दिनों की बारिश से तो कई जगह स्थिति इतनी खराब हो गई है कि सिर्फ रास्ते नहीं स्कूलों के भीतर तक गहरा पानी भरा है। कुछ पानी की गहराई इतनी ज्यादा है कि छोटा बच्चा फिसलकर गिरे तो डूबने की नौबत भी आ सकती है। इस सबके बावजूद जिम्मेदारों का ध्यान इधर नहीं है। न मानसून से पहले इस तरह के रास्तों और स्कूलों को सुरक्षित करने की कोशिश हुई और अब हालात बिगड़ने के बाद पंप से जलनिकासी कराने, बदहाल रास्तों पर मिट्टी-बालू का भराव कराने की पहल भी नहीं हुई है।
मंगलवार की तेज बारिश से कई परिषदीय स्कूलों और रास्तों में पानी भर गया। प्राथमिक विद्यालय नंगलिया नारायण और ठाकुरद्वारा के लालबाग प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य नहीं हो सका। लालबाग प्राथमिक विद्यालय के अंदर और रास्ते दोनों पर पानी था। प्रधानाध्यापिका शगुफ्ता ने दावा किया कि उन्होंने पास के एक निजी भवन में बच्चों को ले जाकर पढ़ाई कराई। कहा कि पालिका के अधिशासी अधिकारी से वर्ष 2025 में शिकायत की थी लेकिन तब से अब तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ। प्राथमिक विद्यालय नंगलिया नारायण में कुड़का नदी का पानी घुस गया। प्रधानाध्यापिका प्रीति सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी विद्यालय में पानी घुसने से परेशानी हुई थी। मिडडे मील का सामान भी भीगकर खराब हो गया था। बीआरसी केंद्र पर 20 जुलाई को इस समस्या की शिकायत की थी लेकिन निराकरण नहीं हुआ। संवाद
छजलैट ब्लॉक के ढाकी में स्थित प्राथमिक विद्यालय के रास्ते में करीब 80 मीटर हिस्से में कीचड़ और पानी है। यहां पढ़ने वाले बच्चे इससे जूझकर स्कूल का सफर पूरा करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि डेढ़ दशक पहले इस रास्ते पर जिला पंचायत ने खड़ंजे का काम किया था, जो अब धंस चुका है। गड्ढों में मिट्टी डालने से यह कच्चे रास्ते जैसा हो गया, जिसपर बारिश होते ही कीचड़ और जलभराव हो जाता है। विद्यालय की सहायक अध्यापिका जीनत परवीन से बताया कि स्कूल में 36 बच्चे हैं। खराब रास्ते के कारण बच्चों के कपड़े, बस्ते, किताबें खराब हो जातीं हैं। वह बंदरों का भी खतरा बताती हैं। प्रधान से प्रशासक बनीं रजनी के पति सीताराम दिवाकर ने कहा कि रास्ता बनवाने के लिए विधायक स्तर से आश्वासन मिला है। संवाद