नोटबंदी ने एक और जान ले ली। बेटा पिता के इलाज के लिए एटीएम और बैंक की लाइन में लगा, लेकिन कैश नहीं मिला। दौड़ भागकर इधर-उधर से दस हजार रुपये का इंतजाम किया। पैसे लेकर अस्पताल पहुंचा तब तक पिता की मौत हो चुकी थी। उधार के दस हजार भी उसके काम नहीं आ सके। घटना सोमवार की है।
संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र के अबूनगर निवासी प्रेमपाल (52) पुत्र सुंदर को रविवार की रात सीने में दर्द की शिकायत हुई। बेटा सोनू मां गीता के साथ सुबह जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। जहां इमरजेंसी में मौजूद ईएमओ डॉ. एनके ओझा ने इलाज किया, लेकिन प्रेमपाल की हालत देखकर दिल्ली ले जाने की सलाह दी।
डॉक्टर के मुताबिक मरीज को दिल का दौरा पड़ा था। अगले 72 घंटे उसकी सेहत में लिए क्रिटिकल था, लेकिन दिल्ली ले जाने के लिए परिजनों के पास एंबुलेंस का किराया तक नहीं था। इसके बाद सोनू पैसे के इंतजाम में लग गया। खुद एटीएम की लाइन में लगा, लेकिन पैसे नहीं मिले।
वहीं रिश्तेदारों को बैंकों में भेजा, उन्हें भी मायूसी हाथ लगी। बाद में इधर-उधर दौड़भाग कर उधार लेकर दस हजार रुपये का इंतजाम किया। दोपहर दो बजे अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि दो घंटे पहले ही पिता की मौत हो चुकी है। मां पिता का शव लेकर घर जा चुकी थी।
सोनू के कंधे पर परिवार की जिम्मेदारी
सोनू के पिता प्रेमपाल मेहनत मजदूरी कर घर का खर्चा चलाते थे। परिवार में दो बेटे और तीन बेटी है। सोनू भाई-बहनोेें में सबसे बड़ा है। अब सोनू के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। उसे बहन सोनम, प्रीति और शालू की पढ़ाई और शादी की जिम्मेदारी उठानी है।