कुंदरकी। दिल्ली से तशरीफ लाए जामिया अहलेबैत के प्रधानाचार्य मौलाना काजी सय्यद अस्करी ने कहा कि माह ए रमजान में जन्नत के दरवाजे खुल जाते है और जहन्नुम की आग ठंडी हो जाती है।
कुंदरकी नगर स्थित इमामबाड़ा हजरत अबुतालिब में मशहूर नोहेखवान रईस अब्बास रिजवी की मां के चालीसवें की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सय्यद काजी अस्करी ने कहा कि रसूल ए करीम और अहलेबैत की जिंदगी हमारे लिए नमूना ए अमल है, उनके बताए रास्ते पर चल कर और इल्म हासिल करके जिंदगी को कामयाब बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रमजान अल्लाह का खास महीना है उसमें खुदा की रहमत और नेमत की बारिश होती है। रमजान में जन्नत के दरवाज़े खुल जाते है और जहन्नुम की आग ठंडी हो जाती है। रमजान में रोजे रखने से शरीर में बीमारियां कम होती है और रूहानी ताकत पैदा होती है जिससे ईमान मजबूत होता है। रोजा रखने से भूख और प्यास महसूस होती है जोकि गरीब और असहाय लोगों की मदद करने का जज्बा कायम करता है। रोजा रखने से इंसानियत का पैगाम मिलता है। उन्होंने इल्म हासिल करने रसूल ए करीम और अहलेबैत से मुहब्बत करने व रोजा नमाज के साथ पाबंदी से इबादत करने, गरीब व असहाय लोगों की मदद करने का आह्वान किया। इससे पहले बुकनाला सादात से आए नईम हैदर ने मरसिया पढ़कर हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी व उनकी शहादत पर रोशनी डाली और नजर हुसैन, रईस अब्बास, नय्यर रिजवी, मौलाना नकी रिजवी ने कलाम पेश किए। मजलिस मे बड़ी सख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल रहे। आखिर में अली अख्त्तर रिजवी ने आभार व्यक्त किया।
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