मुरादाबाद। दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी द्वारा मुरादाबाद के डीपीएस की फ्रेंचाइजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन ट्रस्टी अभिभावकों को अंधेरे में रखे हुए हैं। इसकी वजह से विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट बना हुआ है। डीएम का कहना है कि इस संबंध में एडीएम सिटी को जांच सौंप दी गई है। सोमवार को ट्रस्टियों के साथ बैठक की जाएगी।
मुरादाबाद के दिल्ली पब्लिक स्कूल में करीब डेढ़ हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए दस दिन बीत गए हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन द्वारा अभिभावकों को यातायात की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई। इससे अभिभावक आक्रोशित हो गए और उन्होंने हंगामा किया। इसी बीच अभिभावकों को जानकारी मिली कि एक वर्ष पहले दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी ने मुरादाबाद डीपीएस की फ्रेंचाइजी समाप्त कर दी थी और एक अप्रैल 2022 से स्कूल का लोगो और नाम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। सोसाइटी द्वारा अभिभावकों को इसकी जानकारी देने के भी निर्देश थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन और प्रशासन की ओर से अभिभावकों को जानकारी नहीं दी गई। अब अभिभावक स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रधानाचार्य और प्रबंधक से स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं तो प्रशासन और प्रबंधक चुप्पी साधे हुए है।
इस संबंध में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि एडीएम सिटी को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रबंधन की कुछ समस्याओं की वजह से सोसाइटी द्वारा फ्रेंचाइजी की मान्यता रद्द कर दी गई है। इसका समाधान ट्रस्टियों को करना है। उनके आपसी विवाद की वजह समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि पहली प्राथमिकता विद्यार्थियों के भविष्य की खातिर विद्यालय संचालन करना है। इसके बाद ही विधिक कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। विद्यालय के सभी छह ट्रस्टियों के नाम मंगा लिए गए हैं। उनके साथ बैठक की जाएगी। शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि प्रयास रहेगा कि यदि डीपीएस सोसाइटी मान्यता नहीं देती है तो सीबीएसई से कम से कम एक वर्ष तक स्कूूल के संचालन का अनुरोध किया जाएगा। यदि ट्रस्टी शर्तों को पूरा करेंगे तो डीपीएस सोसाइटी से भी मान्यता देने का अनुरोध किया जाएगा।
वेबसाइट में नहीं मुरादाबाद के डीपीएस का नाम
द दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी की वेबसाइट पर देश और विदेश में संचालित डीपीएस का नाम शहरों के साथ दिया गया है। इस वेबसाइट पर उत्तर प्रदेश में 37 शहर और स्थानों पर डीपीएस संचालित होने की जानकारी दी गई है, लेकिन इसमें मुरादाबाद डीपीएस का नाम नहीं है, जबकि अलीगढ़, बरेली व प्रदेश के अन्य शहरों में संचालित डीपीएस फ्रेंचाइजी का नाम शामिल है।
सीबीएसई के क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी भी नजर
सीबीएसई की सिटी कोऑर्डिनेटर शशि शर्मा का कहना है कि डीपीएस मामले की जानकारी सीबीएसई क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी को दे दी गई है। स्वास्थ्य कारणों से वह अभी देहरादून से बाहर हैं। इसके बावजूद उनकी नजर मामले पर बनी हुई है। अगले सप्ताह तक लौटने पर वह कोई कदम उठाएंगे। शशि शर्मा ने कहा कि डीपीएस का नाम हटने से संस्था समाप्त नहीं होगी। विद्यार्थी सीबीएसई के अधीन अध्यनरत हैं, डीपीएस सोसाइटी ने तो नाम और लोगो के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। यदि कोई एक ट्रस्टी या अन्य व्यक्ति विद्यालय संचालन में दिलचस्पी लेगा तो नाम बदलकर भी स्कूल का संचालन हो सकेगा। इससे विद्यार्थियों के भविष्य पर कोई समस्या नहीं आएगी। यदि ट्रस्टी सोसाइटी की शर्तों को पूरा करती है तो दोबारा से मान्यता मिलने की भी संभावनाएं बरकरार हैं। बोर्ड इस संबंध में कदम जरूर उठाएगा।
13 अप्रैल तक घोषित की स्कूल की छुट्टी
मुरादाबाद। अभिभावक प्रतीक जैन ने बताया कि उनके पास रविवार दोपहर स्कूल से मैसेज आया था, जिसमें 11 से 13 अप्रैल तक स्कूल का अवकाश होने की बात कही गई है, लेकिन छुट्टी किस वजह से है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। सिर्फ अपरिहार्य कारण लिखकर संदेश भेजा गया है। उन्होंने कहा कि स्कूल के इस रवैये से उन्हें अपने बच्चे के भविष्य की चिंता हो रही है। शिवपुरी निवासी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि डीपीएस में कक्षा सात और तीन में दो बच्चे पढ़ते हैं। वेबसाइट पर डीपीएस का नाम नहीं है और नए एडमीशन नहीं लिए हैं। ट्रस्टी डीपीएस के नाम को खराब कर रहे हैं। प्रधानाचार्य के पास कोई जवाब नहीं है। तीन दिन कोई हॉलीडे नहीं है, फिर भी तीन दिन की छुट्टी कर दी है। मार्च से पहले फ्रेंचाइजी समाप्त होने की जानकारी देते तो हम कदम उठाते। बताना तो दूर की बात किताब और यूनिफॉर्म खरीदवाई हैं। इस संबंध में सोमवार को जिलाधिकारी से मुलाकात की जाएगी।
ट्रस्टी डॉ. एसके सिंघल और प्रिंसिपल सुदर्शन सोनार को जब उनका पक्ष जानने के लिए कॉल की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। यदि वह अपना पक्ष रखना चाहते हैं तो संपर्क कर सकते हैं। हम उनसे यह प्रमुख सवाल पूछना चाहते थे-
1. जैसा कि अभिभावक और अधिकारी कह रहे हैं कि एक वर्ष पहले डीपीएस सोसाइटी ने फ्रेंचाइजी समाप्त कर दी गई थी तो उन्होंने अभिभावकों को अंधेरे में क्यों रखा।
2. फ्रेंचाइजी समाप्त होने के क्या-क्या कारण हैं।
3. विद्यार्थियों का भविष्य खराब न हो, इसके लिए उनकी ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
मेरा बेटा 12वीं और बेटी नवीं कक्षा में है। ट्रस्टी अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं। तीन दिन की छुट्टी क्यों है, इसकी जानकारी नहीं दी है। यदि हम अपने बच्चों का नए स्कूल में एडमीशन करते हैं तो वहां की एडमीशन फीस, वार्षिक फीस, किताबें, यूनिफॉर्म आदि खरीदना पड़ेगा। इस अतिरिक्त खर्चे की जिम्मेदारी किसकी है। ट्रस्टियों ने कोरोना काल में भी फीस में कोई छूट नहीं दी थी। बिना पूरी फीस जमाए आखिरी पेपर नहीं देने दिया था। अभी भी प्रबंधन कुछ नहीं बोल रहा है। सोमवार को जिलाधिकारी से मुलाकात की जाएगी।
- गौरव मित्तल, मिलन विहार