मुरादाबाद। विस चुनाव में इस बार 13 हजार 700 कर्मियों की ड्यूटी लगी है। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर चल रही लिहाजा इस बार 25 फीसदी स्टॉफ रिजर्व रखा गया है, लेकिन विधानसभा चुनाव की ड्यूटी पहुंचते ही कर्मचारी इसे कटवाने की जुगत में जुट गए हैं। सिफारिशें शुरू हो गई हैं। कोई अपनी पुरानी बीमारी बता रहा है तो कोई पारिवारिक दिक्कत। कुछ लोग ड्यूटी से बचने को बहानेबाजी से भी नहीं चूकते।
चुनाव के लिए इस बार 13700 कर्मियों की जरूरत है। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर चल रही है लिहाजा इस बार 25 फीसदी स्टाफ रिजर्व में रखा जा रहा है। अधिकारी मुश्किल में हैं कि यदि इसी तरह लोगों की ड्यूटियां कटने लगी तो स्टॉफ कम पड़ जाएगा इसलिए इस बार बेहद विकट परिस्थितियों में ही ड्यूटी काटी जाएगी। बीमारी बताकर ड्यूटी कटवाने वालों के मेडिकल दस्तावेज के साथ उनकी सेहत की जांच भी मेडिकल बोर्ड से कराई जाएगी बोर्ड की रिपोर्ट के बाद ही ड्यूटी कटेगी।
जिले की छह विधानसभा सीटों पर कुल 2667 बूथों पर चुनाव होना है। प्रत्येक बूथ पर चार कर्मियों की ड्यूटी रहेगी। इस तरह 10668 कर्मचारी बूथों पर रहेंगे। कोरोना संक्रमण काल के चलते इस बार एन वक्त पर कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो सकते हैं इस तरह की संभावित विकट परिस्थितियों के कारण 25 प्रतिशत स्टाफ अतिरिक्त रखा गया है। इस तरह कुल 13,335 मतदान कर्मियों की जरूरत होगी। इसके अलावा जोनल, सेक्टर मजिस्ट्रेट आदि अधिकारियों की भी ड्यूटी रहेगी। कुल मिलाकर ये संख्या 13 हजार 700 बैठती है।
इन सबकी चुनाव ड्यूटियां भेजनी शुरू कर दी गई हैं जैसे ही इन्हें ड्यूटी मिल रही हैं उनके द्वारा ड्यूटी कटवाने की कोशिश भी शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक सेक्टर मजिस्ट्रेट आदि की ड्यूटी कटवाने की कोशिश के 30 ही मामले आए हें लेकिन माना जा रहा है कि सभी को ड्यूटी मिलते ही ये संख्या लगातार बढे़गी।
इस बार कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षा मित्र और अनुदेशकों की ड़्यूटी भी अपरिहार्य कारण में सबसे अंतिम विकल्प के तौर पर लगाने को कहा है। जिले में इनकी संख्या करीब 1650 के आसपास है। ऐसे में यदि इनकी ड़यूटी ना लगने पर स्टाफ कम पड़ सकता है। इसलिए इस बार किसी की भी ड्यूटी आसानी से नहीं कटेगी। इसलिए इस बार ड्यूटी कटवाने को लेकर सख्ती की जाएगी।
कर्मिक प्रभारी सीडीओ आनंद वर्धन ने बताया कि सीएमओ की अध्यक्षता में एक मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। जरुरी लगने पर खुद को बीमार आदि बताकर प्रार्थना पत्र देने वालों के मेडिकल दस्तावेज की जांच बोर्ड से कराई जाएगी। जरूरी समझने पर उक्त कर्मी का स्वास्थ्य परीक्षण सत्यता परखेगा। संतुष्ट होने पर बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर ही ड्यूटी कटेगी। कोविड गाइड लाइन के अनुसार जो कर्मी पोलिंग पार्टी रवाना होने से पहले ये समय सीमा पार कर लेंगे और उन्हें कोई लक्षण नहीं होंगे उनकी ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।
इस तरह के तर्क दिए जाते हैं
-खुद को बीमार अपनी पुरानी बीमारी बताकर
-परिवार के सदस्य का बीमार होना।
-घर में छोटे बच्चा अकेला होने का तर्क
-कुछ दिन पूर्व कोरोना संक्रमित होना-परिवार, रिश्तेदारी में शादी -विवाह
निर्वाचन बेहद आवश्यक कार्य है। कर्मचारी इसमें सहयोग करें। बेवजह अपनी चुनाव ड्यूटी कटवाने का प्रयास न करें और जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी करें। गर्भवती महिला, बुजुर्ग और दिव्यांगजन या जिन कर्मियों के साथ वास्तव में गंभीर समस्या या बीमारी होगी उन्हें ही नियमों के अनुसार ड्यूटी से मुक्त किया जाएगा।
आनंद वर्धन, सीडीओ,