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Amroha: शिक्षामित्र और सहायक अध्यापक के विवाद से थाना बना रहा अखाड़े का अड्डा, समझौता कराने में जुटे रहे अफसर

Sun, 01 Sep 2024 11:20 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, गजरौला (अमरोहा)

सार

उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात महिला सहायक अध्यापक उमा देवी ने व शिक्षा मित्र रिंकी चाैधरी पर मारपीट व जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते वीडियो वायरल किया था। वीडियो में उन्होंने घटना से आहत होकर आत्महत्या की बात भी कही थी।
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समझौता कराने में जुटे लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महिला शिक्षामित्र और महिला सहायक अध्यापक के बीच हुए विवाद से थाना कई घंटे तक अखाड़ा बना रहा। समझौता और मामला रफा-दफा करने के लिए एसडीएम, बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और शिक्षक प्रयास में जुटे रहे। इस दौरान भीम आर्मी के लोगों ने भी थाने पहुंचकर विरोध जताया। हालांकि, मामला किसी तरह शांत हुआ।

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बता दें कि नगर के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात महिला सहायक अध्यापक उमा देवी ने व शिक्षा मित्र रिंकी चाैधरी पर मारपीट व जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते वीडियो वायरल किया था। वीडियो में उन्होंने घटना से आहत होकर आत्महत्या की बात भी कही थी। जिसके बाद पुलिस ने उमा देवी की तहरीर पर शिक्षामित्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। रविवार सुबह बेसिक शिक्षा अधिकारी डा.मोनिका, खंड शिक्षा अधिकारी, एसडीएम सुबह ही थाने में पहुंच गए। समझौता कराने के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह, गंगेश्वरी ब्लॉक अध्यक्ष रामवीर सिंह, डॉ.पृथ्वी सिंह, जयवीर सिंह, विपिन पंघाल, सुधीर पोषवाल, वरुण कुमार गुर्जर, डॉ.नरेंद्र सिंह, जयवीर सिंह, विवेक त्यागी को भी बुला लिया।

चूंकि मामले को तूल देने के लिए बिरादरी का रूप देने की कोशिश की गई थी। इसलिए समझौता करने के लिए अनुसूचित जाति के शिक्षक नेताओं, शिक्षकों और शिक्षामित्रों को खास तौर पर बुलाया गया था। उधर, भीम आर्मी से जुड़े युवक भी थाने में सुबह ही पहुंच गए थे। वह किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने देना चाहते थे। इस कारण कई घंटे तक गहमागहमी रही। एक तरह एसडीएम, बीएसए व खंड शिक्षा अधिकारी समझा रही थीं, दूसरी तरफ भीम आर्मी के युवक कार्रवाई की मांग उठा रहे थे। बाद में एसडीएम, बीएसए व खंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षामित्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की बात कही। इसके बाद मामला शांत हुआ और सभी अपने घर चले गए।

थाने में बीएसए व एसडीएम ने की समझाने की कोशिश
नगर के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत महिला सहायक अध्यापक उमा देवी की तरफ से महिला शिक्षामित्र रिंकी चौधरी के खिलाफ शनिवार रात में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जिसकी जानकारी लगने पर रविवार सुबह एसडीएम चंद्रकांता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी थाने में पहुंचीं। यहां पर उन्होंने सहायक अध्यापक उमा देवी व शिक्षा मित्र रिंकी चौधरी से बात कर घटनाक्रम की जानकारी ली। समझौता कराने के लिए दोनों को समझाया। एसडीएम का कहना है कि सहायक अध्यापक उमा देवी सदमे में लग रही हैं। उनको संबल देने की जरूरत है। कहीं कोई गलत कदम न उठा लें। एसडीएम ने यह भी बताया कि महिला शिक्षामित्र ने अफसरों के सामने कहा कि उन्होंने कोई गाली गलौज नहीं की। उन पर मारपीट व जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल करने का आरोप बेबुनियाद है। फिर भी समझौते के लिए उन्होंने माफी मांग ली, लेकिन इसके बाद भी बात नहीं बनी।

सीओ के सामने शिक्षामित्र ने कहा मेरे सम्मान को पहुंची ठेस
शिक्षक, शिक्षक नेताओं और शिक्षामित्र नेताओं एवं संगठनों के सामने रविवार दोपहर सीओ श्वेताभ भास्कर थाने में आरोपी महिला शिक्षामित्र को समझाया। कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है। कोई बड़ी बात नहीं है। यह निपट जाएगा। इस दौरान शिक्षामित्र रोने लगीं। कहा कि उनके सम्मान को इससे ठेस पहुंची है। वह कोई भी कदम उठा सकती हैं। इस पर सीओ ने शिक्षकों और शिक्षक नेताओं को समझाया कि शिक्षामित्र को अकेला न छोड़ा जाए। कहीं इस घटना के बाद वह कोई आत्मघाती कदम न उठा लें।
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बवाल कराने की धमकी देने पर चढ़ा इंस्पेक्टर का पारा
महिला सहायक अध्यापक और शिक्षामित्र के बीच हुए विवाद ने रविवार को तूल पकड़ लिया। गले में नीला पटका डाल कर कई युवक थाने में आए। जिनमें अधिकांश युवक भीम आर्मी से जुड़े बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि मामला रात में ही रफा दफा होने के कगार पर पहुंच गया था, लेकिन वीडियो वायरल कर देने पर तूल पकड़ गया। रही सही कसर भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने पूरी कर दी। वह सहायक अध्यापक उमा देवी के पक्ष में आवाज उठाते हुए नारेबाजी करने लगे। इस दौरान सीओ भी थाने में आ गए थे। नारेबाजी करने के बाद अपनी मांग रख रहे कार्यकर्ताओं में शामिल एक ने पुलिस से कहा कि इंसाफ न मिलने पर वह बवाल करा सकता है। जिस पर इंस्पेक्टर हरीशवर्धन सिंह का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने बवाल की धमकी दे रहे युवक को कड़े शब्दों में हिदायत दी। कहा कि शिक्षकों के बीच का मामला है। इसलिए उनको राजनीतिक रोटियां सेंकने की जरूरत नहीं है। इस बीच सीओ ने समझाया कि नारेबाजी करने की जरूरत तब पड़ती, जब पुलिस कार्रवाई से इनकार कर देती।
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