जिसे व्हाइट एप्रन में देखने का सपना आंखों में संजो रखा था वो कफन में लिपटी नजरों के सामने पड़ी थी। ...लाख कोशिश कीं लेकिन बेटी का शव देखकर संतोष अग्रवाल आंसुओं को बहने से नहीं रोक सके। बोले, घर में इकलौती बिटिया थी। सबकी लाडली थी।
तमाम सपने संजो रखे थे। सोचा था पढ़ाई पूरी करके बेटी डाक्टर बनकर व्हाइट एप्रन में घर लौटेगी लेकिन आज सफेद कफन में घर ले जा रहे हैं। मेडिकल कालेज के गर्ल्स हॉस्टल में अपने रूम में फंदा लगाकर सुसाइड करने वाली बीडीएस छात्रा दीक्षा अग्रवाल के पिता संतोष अग्रवाल शनिवार को आधी रात रोते बिलखते हुए बेटी का शव साथ ले गए।
पश्चिम बंगाल में दिनाजपुर निवासी दीक्षा ने शनिवार सुबह गर्ल्स हॉस्टल में बेड शीट का फंदा बनाकर पंखे से लटक कर खुदकुशी कर ली थी। दीक्षा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह अपनी रूम पार्टनर्स के कमेंट्स से दुखी थी।
शव लेने पहुंचे दीक्षा के पिता और चाचा का कहना था कि उन्होंने सपना संजोया था कि बेटी डाक्टर बनकर आएगी, सोचा नहीं था कि एक दिन इस तरह वो कफन में लिपटी मिलेगी। उधर, हादसे के बाद से दीक्षा की तीनों रूम पार्टनर्स डरी सहमी हैं। टीएमयू प्रशासन ने बीते दिन ही उन्हें दूसरे रूम में शिफ्ट कर दिया था।