मुरादाबाद। पंचायतीराज विभाग में गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर प्रशासकों ने वाटर कूलर और हैंडपंप रिबोर के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए। आचार संहिता लागू होने के बावजूद गांवों में विकास के नाम पर अकेले कार्तिक इंटर प्राइजेज से करीब दो करोड़ रुपये के वाटर कूलर खरीद लिये गए। कमिश्नर ने फर्म, उसका पता, उसके स्वामी का नाम व पता आदि का ब्योरा तलब किया तो तत्कालीन डीपीआरओ समेत सभी एडीओ ने गोलमोल रिपोर्ट भेज दी। डीपीआरओ ने भी 100 ग्राम पंचायतों से विकास कार्यों का ब्योरा मांगा तो एडीओ उसे उपलब्ध कराने में कतरा रहे हैं। लिहाजा 85 ग्राम पंचायतों को पुन: नोटिस जारी करना पड़ा है। आरोपों से घिरी फर्म ने एक साल पहले ही अपना जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराया है। सूत्रों के मुताबिक फर्म को जो एचएसएन कोड एलाट है उसके आधार पर फर्म सिर्फ सेवा प्रदान कर सकती है। उत्पाद आपूर्ति नहीं कर सकती है। इसके बाद भी फर्म ने ग्राम पंचायतों का वाटर कूलर आपूर्ति किया है।
पंचायत चुनाव को लेकर 24 दिसंबर 2020 को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। 25 दिसंबर से ग्राम पंचायतों की कमान संबंधित ब्लाक के एडीओ के हाथ में प्रशासक के रूप में आ गई। 25 मई 2021 तक एडीओ ने प्रशासक के रूप में कार्य किया। इस दौरान आचार संहिता लागू होने के बावजूद ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर जमकर धन खर्च दिखाया गया। सबसे अधिक धनराशि ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर खर्च की गई दिखाई गई। इसमें वाटर कूलर और हैंडपंप रीबोर के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये गए। जिले के आठ ब्लाकों में से छह ब्लाकों में 80 वाटर कूलर के नाम पर 1,99,14000 रुपये का भुगतान किया गया। खास बात यह रही कि इनमें से पांच विकास खंडों में एक ही फर्म से 74 वाटर कूलरों की खरीद प्रति वाटर कूलर 2,48,925 रुपये की दर दिखाई गई। जबकि एक विकास खंड में छह वाटर कूलरों की खरीद 2,48,950 रुपये की दर से खरीदे गए दिखाए गए।
तत्कालीन डीपीआरओ ने वाटर कूलर पर खर्च किये 57 लाख
जिले के आठ विकास खंडों में छजलैट ब्लाक में एडीओ नियुक्त न होने के कारण तत्कालीन डीपीआरओ राजेश कुमार के पास बतौर प्रशासक चार्ज रहा। उन्होंने छजलैट ब्लाक में सिर्फ वाटर कूलर पर 57 लाख रुपये पांच माह में खर्च कर दिये। इस धनराशि से उन्होेंने 23 वाटर कूलर लगवाए। खास बात यह रही कि यह वाटर कूलर भी कार्तिक इंटर प्राइजेज से लगवाए गए। यह वही फर्म है जिसे शहर से सटी ग्राम पंचायत सादकपुर में वाटर कूलर लगाने से पहले ही भुगतान कर दिये जाने का मामला सामने आया था। इसी के बाद मामला तूल पकड़ा और डीपीआरओ समेत पंचायतराज महकमा आरोपों से घिर गया था। कमिश्नर ने फर्म का ब्योरा तलब किया तो तत्कालीन डीपीआरओ समेत अन्य सभी एडीओ ने गोलमोल रिपोर्ट भेज अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली थी।
भुगतान में नियम कायदे भी रखे ताक पर
प्रशासकों ने वाटर कूलरों की खरीद में कई स्थानों पर नियम कायदे भी ताक पर रख दिये। सदर ब्लाक की ही शहर से सटी ग्राम पंचायत बरबारा मझरा, सोनकपुर देहात समेत जिले की कई अन्य ग्राम पंचायतों में तीन-तीन वाटर कूलर लगाए गए। जिनकी कीमत पांच लाख से अधिक होती है। शासनादेश के मुताबिक पांच लाख से अधिक धनराशि खर्च करने से पहले डीएम से वित्तीय स्वीकृत लेनी पड़ती है। इसी तरह कई ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां दो-दो वाटर कूलर लगाए गए। जिसकी कीमत ढाई लाख से अधिक होती है। इसके लिए डीपीआरओ से वित्तीय स्वीकृति ली जानी चाहिए थी जो नहीं ली गई।
फर्म स्वामी मुजफ्फरनगर का, एक साल पहले खोली फर्म
कार्तिक इंटर प्राइजेज फर्म की पड़ताल करने पर पता चला कि उसके स्वामी का नाम वैभव गर्ग है। फर्म का पता सिवारा रोड, वार्ड नंबर चार ठाकुरद्वारा लिखा है। फर्म 11 मार्च 2020 को जीएसटी में रजिस्टर्ड कराई गई है। फर्म स्वामी ने दूरभाष पर बताया कि वह मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। पूछताछ में यह भी बताया कि उसकी फर्म द्वारा सबसे सर्वाधिक कार्य मुरादाबाद में ही किया गया है।
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एचएसएन कोड सर्विस का, किया उत्पाद की आपूर्ति
वाटर कूलर सप्लाई करने वाली फर्म ने अपने जीएसटी रजिस्ट्रेशन में तीन एचएसएन कोड पंजीकृत कराया है। पहला एचएसएन कोड: 995428 है। जिसके आधार पर कंपनी अन्य सिविल इंजीनियरिंग कार्यों की सामान्य निर्माण सेवाएं दे सकती है।
दूसरा एचएसएन कोड: 995424 है। जिसके आधार पर फर्म स्थानीय जल और सीवेज पाइप लाइन, बिजली और संचार केबल से संबंधित कार्यों की सामान्य निर्माण सेवाएं दे सकती है।
तीसरा एचएसएन कोड: 995479 है। जिसके आधार पर ऊपर कवर किये गए कार्यों को पूरा करने/परिष्करण करने की मरम्मत, परिवर्तन, परिवर्धन, प्रतिस्थापन, रख रखाव से संबंधित सेवाएं प्रदान कर सकती है।
जानकार बताते हैं कि वाटर कूलर सप्लाई करना उत्पाद की आपूर्ति की श्रेणी में आता है। लिहाजा यहां भी गड़बड़ी सामने आ रही है।
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मैं मूल रूप से मुजफ्फर नगर का रहने वाला हूं। मैंने ही फर्म का जिले में मुख्य रूप से कार्य देखा है। जिले की ग्राम पंचायतों में नियमानुसार वाटर कूलर, फागिंग मशीन, स्प्रे मशीन आदि की आपूर्ति की है। वाटर कूलर का मैं कोई अधिकृत विक्रेता नहीं हूं। न ही मेरा कोई शोरूम इस जिले में है। मैंने दिल्ली से वाटरकूलर लाकर लगवाया है। सभी कार्यों का फर्म की ओर से बिल ग्राम पंचायतों को दिया गया है। अधिकारियों ने सभी का परीक्षण कर भुगतान किया है।
दिनेश दीक्षित, मैनेजर, कार्तिक इंटर प्राइजेज
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प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर काफी धनराशि खर्च की गई है। रेंडम चेकिंग में करीब 100 ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर खर्च किये गए करोड़ों रुपये का भुगतान संदिग्ध पाया गया है। जिसमें वाटर कूलर की खरीद भी शामिल है। संबंधित एडीओ व पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर बिल, बाउचर, टेंडर प्रक्रिया आदि का ब्योरा मांगा गया था। कुल 15 ग्राम पंचायतों से यह मिल सका है। जिसके लिए पुन: नोटिस जारी करते हुए संबंधितों का ब्योरा उपलब्ध न कराने पर स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है। 2.50 लाख से पांच लाख तक के कार्यों की स्वीकृति डीपीआरओ से लेनी होती है। उसके ऊपर के कार्यों के लिए डीएम से। लेकिन कई स्थानों पर डीपीआरओ व डीएम को बाईपास करते हुए एक ही कार्य को टुकड़ों में दिखा धन निकाला गया है। पूरे मामले की गहनता से जांच चल रही है। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की और कराई जाएगी।
आलोक प्रियदर्शी, डीपीआरओ