पुलिस और औषधि विभाग की टीम को नकली दवा के कारोबारी को गिरफ्तार करने में शुक्रवार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। घर बेचने के बाद गायब चल रहे दवा कारोबारी को पुलिस ने झांसा देकर हरिद्वार से बुलाया था। हिरासत में लेने के बाद ही उसके अधिवक्ता ने गिरफ्तारी का स्टे आर्डर पुलिस को सौंपा तो अफसर परेशान हो गए। दिन भर की मशक्कत के बाद शाम को उसको दवा के एक पुराने मामले में जारी वारंट पर जेल भेजना पड़ा।
नकली दवा बनाने के आरोपी कंपनी मालिक को गिरफ्तार करने में पुलिस और औषधि विभाग की टीम के पसीने छूट गए। आरोपी राकेश कुमार ढल की प्रिंस रोड स्थित डीके फार्मा कंपनी पर 15 जनवरी को छापामारी कर 20 लाख रुपये का कच्चा माल और लाखों रुपये की तैयार दवा पकड़ी थी। उसके बाद से आरोपी फरार हो गया था। जांच में दवा नकली पाई गई थी। उसके बाद राकेश ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। पुलिस के अनुसार पिछले महीने राकेश ढल ने अपना मकान बेच दिया था और वह शहर से गायब हो गया। दो दिन पहले हाईकोर्ट का स्टे खत्म हो गया था। उसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर और पुलिस उसको दबोचने की फिराक में जुटी। पुलिस ने मोबाइल पर संपर्क कर उसको कोतवाली में जमा दवा और कंपनी पर लगी सील खुलवाने का झांसा देकर बुलाया और शुक्रवार सुबह दबोच लिया। दोपहर में थाने पहुंचे राकेश कुमार के परिजनों और अधिवक्ता ने पुलिस को हाईकोर्ट का एक दूसरा स्टे दिखाया। पहला स्टे खत्म होने के तत्काल बाद आरोपी ने दूसरा स्टे प्राप्त कर लिया था, जिसकी पुलिस और अफसरों को जानकारी नहीं थी। इससे पुलिस को पसीना आ गया। परेशान अधिकारियों ने शाम को उसको ड्रग एक्ट के एक पुराने मामले के वारंट में जेल भेजा गया।
राकेश कुमार ढल की कंपनी डीके फार्मा की ज्यादातर दवाएं जांच में नकली निकली हैं। हाईकोर्ट का स्टे दिखाने पर उसको एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है। अब उसको रिमांड पर लेकर नकली दवा बिक्री के उसके गैंग के बारे में पूछताछ की जाएगी।
- नरेश मोहन राकेश, ड्रग इंस्पेक्टर।
आरोपी फरार चल रहा था। कई महीने की मशक्कत के बाद पुलिस ने उसको दबोचा था। आरोपी पर कई जिलों में ड्रग एक्ट के मुकदमे विचाराधीन हैं। अकेले मुजफ्फरनगर से ही चार वारंट आए हुए हैं। मुरादाबाद के एक पुराने वारंट में जेल भेज दिया गया है। सुदेश गुप्ता, सीओ कटघर