कोरोना के कहर से मुरादाबाद में आज सारे रिकॉर्ड टूट गए। एक दिन में कोरोना से 10 मौतें हो गईं और 1752 नए संक्रमित मिले हैं। मरने वालों में दरोगा, अधिवक्ता और नगर निगम के पार्षद शामिल हैं। जिले में एक्टिव केस 6135 हो गए हैं।
मुरादाबाद में भी अब हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। आलम ये है कि कोरोना मरीज तो रोजाना अपनी जान गंवा ही रहे हैं दूसरी बीमारियों की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे मरीज भी समय पर बेड और उपचार न मिलने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। कोरोना संक्रमण से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
शुक्रवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो कहीं बेड के इंतजार में मरीज व्हील चेयर पर दिखे तो कहीं फर्श पर बेसुध मिले। शहर में नौ निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमण के मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन ने यहां मरीजों की फीस भी निर्धारित की है। इन अस्पतालों की व्यवस्थाओं के लिए तहसीलदार और एसडीएम को बतौर नोडल अधिकारी नामित किया गया है, लेकिन आईसीयू और आइसोलेशन वार्ड फुल होने की वजह से गंभीर मरीजों की जान जा रही है।
मुरादाबाद में नहीं खत्म होने देंगे ऑक्सीजन : कमिश्नर
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा है कि मुरादाबाद मंडल में निरंतर अस्पतालों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। यही वजह है कि अन्य महानगरों की तुलना में हमारे यहां दिक्कत काफी कम है। ऑक्सीजन की कमी की बाबत कहा कि उनके पास वर्तमान में पर्याप्त स्टाक है और दस टन लिक्विड कनेक्शन आज और पहुंच गया। इससे बैकअप बना रहेगा।
उन्होंने जनता से अपेक्षा की है कि लोग कोरोना के लक्षण मिलते ही टेस्ट करा लें और होम आइसोलेट होकर एहतिआत बरतें। लोग मामूली खराश, बदन दर्द और जुकाम को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे गंभीर हालत हो जाती है। स्वस्थ रहने के लिए मामूली लक्षण पर इलाज होकर जल्दी ठीक हो सकते हैं। उन्होंने सभी से संयम बरतने की भी अपील की।