मुरादाबाद। जनपद के 748 स्कूलों के बच्चे हाड़ कंपाने वाली ठंड में टाट-पट्टी पर बैठने को मजबूर हैं। इन स्कूलों में फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि कायाकल्प में मिला फर्नीचर भी टूटने लगा है। इस संबंध में अधिकारियों ने कहा कि 186 विद्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
मुरादाबाद जनपद में 1408 विद्यालयों में से सिर्फ 660 विद्यालयों में ही फर्नीचर की व्यवस्था है। शेष में विद्यार्थी फर्नीचर का इंतजार कर रहे हैं। प्राइमरी पाठशाला गिन्नौर दी माफी में कक्षा एक से पांच तक 80 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सभी बच्चे जमीन पर चटाई पर बैठकर पढ़ते हैं। प्रधानाचार्य लता यादव ने बताया कि सर्दी के मौसम में हर बार फर्नीचर की मांग की जाती है, लेकिन अभी तक मिला नहीं है। धन्नूपुरा प्राइमरी विद्यालय में 135 विद्यार्थियों का नामांकन है। यहां पर फर्नीचर तो है ही नहीं, साथ में चटाई भी फटी हुई है। प्रधानाचार्य चित्रारंजन ने बताया कि बच्चों को काफी परेशानी होती है, लेकिन संसाधन नहीं होने की वजह से मजबूर हैं। गिंदौड़ा प्राथमिक विद्यालय में 130 विद्यार्थियों का नामांकन है। प्रधानाचार्य पारुल गुप्ता ने बताया कि विद्यालय में सिर्फ 30 बच्चों के लिए फर्नीचर है, जबकि सौ विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं।
कायाकल्प का भी टूटने लगा फर्नीचर
प्राथमिक विद्यालय जाटवों वाली मढ़ैया के प्रधानाचार्य गिरिराज विद्यालय में 209 विद्यार्थियों का नामांकन है। विद्यालय में कायाकल्प के तहत विकास कार्य होने पर फर्नीचर की व्यवस्था की गई थी। हालांकि फर्नीचर के पेंच निकलने लगे हैं और बेंच के तख्ते टूट गए हैं।
20 माह पहले आया था एक करोड़ 41 लाख
शासन की ओर से मार्च 2020 में 186 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध करवाने के लिए एक करोड़ 41 लाख रुपये आए हैं। यह सभी जूनियर विद्यालय में हैं। अधिकारियों के अनुसार लॉकडाउन की वजह से प्रक्रिया में देरी हुई है। फर्नीचर की खरीद के लिए जैम पोर्टल पर निविदा निकालने के बाद अर्हता पूरी करने वाली कंपनी को खरीद ऑर्डर दिया जाता है। इसमें कम से कम तीन कंपनियों का होना जरूरी है। पहली और दूसरी बार में सिर्फ एक कंपनी मानकों को पूरा कर रही थी। इसलिए तीसरी बार निविदा निकाली गई, लेकिन एक कंपनी ने सैंपल नहीं दिए। अब चौथी बार निविदा निकली है। अनुबंध और सिक्योरिटी जमा करने की कार्रवाई भी हो चुकी है।
विद्यालयों में कहीं दो सौ, कहीं ढाई सौ तो कहीं छह सौ विद्यार्थियों के नामांकन तक हैं। कहीं विद्यालय में 50 भी विद्यार्थी हैं। हालांकि मेरे विद्यालय में 193 बच्चों के नामांकन हैं। ऐसे में यदि एक विद्यालय में औसतन सौ नामांकन भी मानें, तब भी 74 हजार विद्यार्थी कड़ाके की ठंड में जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। कायाकल्प के बाद ज्यादातर विद्यालयों में टाइल्स बिछाई गई हैं। डीबीटी के माध्यम से बहुत से बच्चों के खातों में 1100-1100 रुपये नहीं आए हैं। बच्चे एक कपड़े में पढ़ने आते हैं। एक तो उनके पास स्वेटर, जूते-मोजे नहीं हैं और स्कूल में भी उन्हें जमीन पर बैठना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों को ठंड लगने का खतरा है।
सर्वेश शर्मा, जिला अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ।
शासन से करीब एक करोड़ 40 लाख रुपये मिला था। इसका टेंडर होने के बाद वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। बाकी स्कूलों के लिए अभी बजट नहीं है।
बुद्धिप्रिय सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।