पाकबड़ा। मुखिया की मृत्यु के बाद एक विधवा और उसकी दिव्यांग बेटी राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना की पेंशन पाने के लिए एक वर्ष से अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं लेकिन आज तक सत्यापन नहीं हो सका। पीड़ित महिला का आरोप है कि वह लेखपाल और उसके सहयोगी को सत्यापन के पांच सौ रुपये नहीं दे सकी, इसलिए उसका आवेद दो बाद निरस्त कर दिया गया। डीएम और कमिश्नर से गुहार लगाने के बावजूद उसका आवेदन मंजूर नहीं हो सका है।
मुरादाबाद तहसील क्षेत्र के कांशीराम नगर निवासी अमर सिंह प्रजापति की मौत 23 अप्रैल 2021 को हो गई थी। पत्नी लक्ष्मी देवी ने बताया कि अमर सिंह प्रजापति को बुखार आया था और पैसे के अभाव में उन्हें अस्पताल में भर्ती नही करा पाए थे, कोरोना की दूसरी लहर के कारण उन दिनों अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे थे। पति की मृत्यु के बाद कमाई का जरिया समाप्त हो गया और परिवार आर्थिक तंगी का शिकार हो गया। दंपती की 27 वर्षीय दिव्यांग बेटी की देखभाल के लिए भी धन चाहिए। तंगी केे कारण बेटे और दूसरी बेटी की पढ़ाई भी छुड़वानी पड़ी। लक्ष्मी देवी ने बताया कि पति के देहांत के तीन माह बाद उन्होंने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन किया था। आवेदन का सत्यापन करने को लेखपाल एक सहयोगी के साथ कांशीराम नगर आए थे। आरोप है कि लेखपाल ने सत्यापन के एवज में पांच सौ रुपये सुविधा शुल्क की मांग की थी। घर में खाने के लिए पैसे नहीं थे तो उन्हें कैसे दे पाती। योजना का लाभ पाने के लिए उन्होेंने बहुत बारी तहसील और लेखपाल के चक्कर लगाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने दोबारा आवेदन किया लेकिन दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। लक्ष्मी देवी का कहना है कि यदि उन्हें तीस हजार रुपये मिल जाते तो वह कर्ज उतार कर बचे धन से कुछ कारोबार कर परिवार चलातीं।
- आरोप निराधार है। पहली बार कागज पूरा नही होने के चलते आवेदन निरस्त हुआ था दूसरी बार में आवेदन के कागज में पास बुक अपने मृत पति की दे दी थी। मैंने एसडीएम की बात परिवार से कराई थी। मेरा इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण हो चुका है। पैसे मांगने के आरोप निराधार है। इन्हीं लोगों की गलती है।
विवेक गुप्ता, लेखपाल, सदर तहसील
- सोमवार को परिवार से मिलकर पूरे मामले की जांच कराऊंगा। आवेदन पत्र देखकर उसकी स्थिति का पता लगा लिया जायेगा। परिवार को आवेदन की स्थिति देखने के बाद लाभ दिलाया जाएगा। लेखपाल पर लगाए गए आरोप गलत है।
सदर प्रशांत तिवारी, एसडीएम सदर
- मैंने खुद इस मामले की जांच की मांग कमिश्नर और जिलाधिकारी से की थी। तहसील में लक्ष्मी देवी से पांच सौ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी लेकिन उनके पास यह पैसे देने को नही थे इसलिए लेखपाल ने उनका पहला आवेदन निरस्त कर दिया और दूसरे आवेदन पर परेशान किया जा रहा है। मामले की जांच का आश्वासन कमिश्नर ने दिया था लेकिन इसके बाद भी कोई कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
राजेश रस्तोगी, अध्यक्ष विश्व हिंदू महासंघ