मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी का तमगा पाने वाला मुरादाबाद शहर बारिश शुरू होने से पहले ही जलभराव और गंदगी के संकट में डूबा नजर आ रहा है। हालत यह हैं कि कई वार्डों में बिना बारिश ही नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। ढक्का, कुंदनपुर, जयंतीपुर, सीतापुरी और करूला जैसे इलाकों में लोग ईंट-पत्थर रखकर रास्ता पार करने को मजबूर हैं। जगह-जगह चोक पड़े नालों से उठ रही बदबू और गंदगी ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
नाले चोक पड़े हैं और नालियों का गंदा पानी सड़कों पर भर रहा है। लोग ईंट, पत्थर रखकर किसी तरह रास्ते से गुजर रहे हैं लेकिन जनप्रतिनिधि और नगर निगम इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। करूला व ढक्का के लोगों का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि बकरीद से पहले नगर निगम उनके वार्ड की सुध लेगा और सफाई होगी। जलभराव की समस्या का निस्तारण किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जयंतीपुर के लोगों ने बताया कि उनके इलाके का आधा हिस्सा वार्ड-30 और आधा वार्ड-53 में आता है। दोनों पार्षद एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर काम को टालते रहते हैं। वहीं ढक्का, सीतापुरी और कुंदनपुर में नाले चोक होने से लोग गंदगी के बीच जीवन जी रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय पार्षद से लेकर निगम कार्यालय तक गुहार लगा ली लेकिन समाधान नहीं हुआ। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह का कहना है कि लोगों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
कोट्स
हर साल यही हाल होता है। नाले महीनों से साफ नहीं हुए हैं। घरों के सामने गंदा पानी भरा रहता है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं लेकिन नगर निगम के कर्मचारी सिर्फ खानापूरी करके चले जाते हैं। बकरीद से पहले सफाई की उम्मीद थी, वह भी टूट गई।
- इद्दा
सड़क पर इतना गंदा पानी भरा रहता है कि घर से निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार पार्षद और निगम अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रात में बदबू और मच्छरों के कारण बैठना तक मुश्किल हो जाता है।
- वाजिद
हमारा इलाका दो वार्डों में बंटा है। इसी का फायदा उठाकर दोनों पार्षद जिम्मेदारी से बचते हैं। कोई सफाई नहीं कराता। नालियां चोक हैं और हल्की बारिश में भी सड़क तालाब बन जाती है। जनता परेशान है लेकिन अधिकारियों को फर्क नहीं पड़ रहा।
- आसिम
घर के बाहर गंदगी और जलभराव से हालात बदतर हो चुके हैं। बच्चे स्कूल जाने में परेशान होते हैं। कई बार लोग फिसलकर गिर चुके हैं। निगम के अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
- प्रदीप