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अब क्यूआर कोड स्कैन कर की जाने लगी ठगी, ओएलएक्स जैसी साइटों पर फैला ठगों का जाल

Sat, 16 Nov 2019 02:29 PM IST
शाहरुख खान अभिषेक सिंह, अमर उजाला, मुरादाबाद
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सांकेतिक तस्वीर
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पेटीएम, भीम ऐप, फोन पे जैसे कई एप्लीकेशन के जरिए आनलाइन भुगतान में क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब इसी क्यूआर कोड को स्कैन कर ठगी भी की जाने लगी है। इसका खुलासा ठाकुरद्वारा के युवक के साथ हुई साइबर ठगी की वारदात की जांच के दौरान साइबर सेल ने किया है। 
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इसके साथ ही लोगों से अपील की है कि इस तरह से ठगी की अन्य वारदातें भी हो सकती हैं। लिहाजा सावधानी बरतें और क्यूआर कोड को स्कैन करने से पहले अच्छी तरह से ये जांच लें कि क्यूआर कोड रकम देने के लिए या लेने के लिए भेजा गया है। क्योंकि इसमें लापरवाही करने वाला व्यक्ति ठगी की वारदात का शिकार हो सकता है।

 ठाकुरद्वारा में रहने वाले प्रशांत ने सात दिन पहले ओएलएक्स पर एक कार बेचने का सौदा तय किया। इस दौरान कार खरीदने के लिए भुगतान करने के बहाने उनके पास क्यूआर कोड भेजा गया। 
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प्रशांत ने समझा कि क्यूआर कोड को स्कैन करने से उनके खाते में रुपये आ जाएंगे लेकिन ऐसा करने के बाद ओटीपी नंबर डालते ही उनके खाते से 40 हजार रुपये उड़ गए।
 
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साइबर सेल के प्रभारी सतेंद्र सिंह ने बताया कि क्यूआर कोड पर भुगतान के लिए दूसरे व्यक्ति ने जो क्यूआर कोड प्रशांत को भेजा था, उसमें रुपये प्राप्त करने के बजाय रुपये भेजने का ऑप्शन सेट किया गया था, इसकी जानकारी प्रशांत को नहीं थी। जिस वजह से वह ठगी का शिकार हुआ। 

क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दूसरे व्यक्ति के डिजिटल पेमेंट अकाउंट के बारे में पूरी जानकारी कोड को स्कैन करने वाला व्यक्ति हासिल कर लेता है। 

ये ठीक उसी तरह से होता है जैसे की बड़ी बड़ी दुकानों में किसी सामान पर बने बार कोड को स्कैन कर सामान के बारे में पूरी जानकारी दुकानदार हासिल कर लेता है। क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद ओटीपी नंबर हासिल कर ठगी की वारदात की जाती है।
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