मुरादाबाद। नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। वर्ष 2000 में एमडीए ने दिल्ली रोड पर नया मुरादाबाद बसाने का अपना ड्रीम प्रोजेक्ट शुरू किया था। 16 सेक्टरों में नया मुरादाबाद को बसाया गया। लोगों ने जमा पूंजी और लोन लेकर प्लॉट भी खरीदे और आशियाने भी बनाए। हालांकि लेकिन सरकारी सुविधाओं की सुस्त रफ्तार के चलते आज तक नया मुरादाबाद पूरी तरह नहीं बस सका। लोगों की सरकारी महकमे से विकास की आस टूट गई है। अमर उजाला टीम ने बुधवार को नए मुरादाबाद के अधिकांश सेक्टरों में पहुंचकर कर हकीकत जानी तो सच्चाई सामने आ गई।
मझोला थाने के पास से नए मुरादाबाद को जोड़ने वाली लिंक रोड के बीच सड़क में गहरा गड्ढा हादसे को न्योता दे रहा है। सेक्टर एक के महाकालेश्वर मंदिर के सामने ही सड़क टूटी थी और मंदिर गेट के सामने ही पानी भरा था। अशोका पार्क से सेक्टर 12ए, 13, 14, और 15 और 10 में अधिकांश जगह स्ट्रीट लाइटें नहीं जलने की शिकायतें थी। सेक्टर 3 में 12 मीटर चौड़ी रोड पर झाड़ियां उगी थी और आधी सड़क पर घास उगी थी। सेक्टर 16, 13 दिल्ली रोड के नजदीक होने की वजह से यहां सबसे अधिक बसावट थी, लेकिन सफाई व्यवस्था, सड़कों पर झाड़ियां और पानी की आपूर्ति की सरकारी व्यवस्था नहीं थी। यहां बैंक तो है ही नहीं ,एटीएम बूथ तक नहीं हैं। डाकघर नहीं है, रजिस्ट्री के लिए भी तीन किलोमीटर पाकबड़ा या मुरादाबाद शहर में आते हैं।
वर्ष 2018 से नए मुरादाबाद सेक्टर 3 में मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन सरकारी सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। उनके वार्ड में 9 से 12 फीट चौड़ी सड़कें झाड़ियों कीं वजह से तीन से चार फिट चौड़ी रह गई। पानी की आपूर्ति नहीं है। चार दिन पहले मेरी बेटी की साइकिल में पंक्चर हो गया, तो मुझे दो लोगों को साथ लेकर दो किमी पाकबड़ा जाकर पंक्चर लगवाना पड़ा। सीवर लाइन के टक्कर टूटे हुए हैं। डर लगता है कि कोई बच्चा ना गिर जाए।
सत्यवीर सिंह , सेक्टर 3
सेक्टर की सड़कें टूटी हैं। उनसे बजरी निकली है। आए दिन दुपहिया वाहन गिरते हैं। सीवर सिस्टम नहीं है, जिससे पानी भरता है। मजबूरन लोगों को अपनी खुद की व्यवस्था करनी पड़ रही है। एमडीए स्तर की कोई सुविधा नहीं है। बच्चों को स्कूल में कोई प्रोजेक्ट बताया जाए तो सामान लेने भी मुरादाबाद शहर में जाना पड़ता है।
नकुल शर्मा सेक्टर 16
दिल्ली रोड के नजदीक होने की वजह उनके उनके सेक्टर में सबसे अधिक बसावट है, लेकिन एमडीए स्तर से कोई सुविधा नही है। पानी की सप्लाई नहीं है। लोगों ने बोरिंग कराकर खुद की पानी की व्यवस्था की है। सफाईकर्मी भी नहीं आते। खुद ही सफाई करते हैं। सड़क किनारे उगी झाड़ियों में सांप रहते हैं।
नरेश शर्मा सेक्टर 16
तीन साल से सेक्टर 12 में रहता हूं, यहां पार्कों की हालत खराब है। आसपास के गांवों के लोग वहीं कूड़ा डालते हैं। कई बार एडीएम अधिकारी और जिलाधिकारी के यहां भी शिकायत कर चुका हूं, लेकिन कोई नहीं सनता।
विपुल कुमार ,सेक्टर 12
मैने 2017 में प्लाट लिया था। पिछले साल ही मकान बनाया है, लेकिन सरकारी तौर पर सुविधाएं नहीं है। 30 मीटर रोड पर भी खंभों पर लाइटें नहीं हैं। रात को अंधेरा होता है और दिन छिपने के बाद वाहन से भी शहर में सामान लेने जाते हुए भी डर लगता है।
अंकुर खन्ना सेक्टर 6
सेक्टर के आसपास का पूरा एरिया सुनसान रहता है। आसपास बैंक और पोस्टआफिस भी नहीं है। मेडिकल स्टोर नहीं होने के कारण काफी दिक्कत होती है। दो से तीन किमी जाकर सामान लाना पड़ता है।
प्रिया चौधरी, सेक्टर 15
कॉलोनी आवास विकास से विकसित है, लेकिन डिवाइडर वाली रोड पर स्ट्रीट लाइट बहुत ही कम है। दिन छिपने पर अंधेरा होता है। आने जाने में भी डर लगता है।
चारु, बुद्धि विहार सेक्टर 10