मुरादाबाद। कोरोना काल की कड़वाहट के बीच लोगों में ‘मीठी गोली’ पर विश्वास का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की ओर लोगों का रुझान बढ़ने लगा है। होम्योपैथिक डॉक्टरों की ओपीडी में करीब चालीस फीसदी मरीज बढ़े हैं। दवाओं की बिक्री में भी पहले की तुलना में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है।
दूसरी लहर में कोरोना संक्रमण ने लोगों में हाहाकार मचा दिया था। अस्पतालों में संक्रमित मरीजों को बेड नहीं मिल रहे थे। ऑक्सीजन के लिए भी मारामारी थी। पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। ऐसे हालात में लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए होम्योपैथ की लाइफ सेविंग दवाओं का इस्तेमाल शुरू किया। इसके चलते कोरोना की दूसरी लहर में होम्योपैथिक दवाओं की बिक्री करीब पचास फीसदी बढ़ गई थी। बाद में संक्रमण की रफ्तार में कमी आई, लेकिन मीठी गोली पर बढ़े विश्वास पर कोई कमी नहीं आई। लोगों का ये विश्वास अब बढ़ता ही जा रहा है। यही वजह है कि ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। कोविड से पहले की तुलना में ओपीडी में करीब 30 से 40 फीसदी बढ़ गए हैं। लोग गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे हैं। इससे दवाओं की बिक्री भी 20 से 30 प्रतिशत बढ़ गई है।
होम्योपैथ की ओर लोगों का रुझान बढ़ा : शर्मा
मुरादाबाद। पूर्व जिला होम्योपैथिक अधिकारी डा. राजकुमार शर्मा ने बताया कि कोरोना में होम्योपैथी दवाएं कारगर साबित हुईं। जिन कोरोना संक्रमित मरीजों ने होम्योपैथी दवाएं ली, उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी। इससे लोगों का होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की ओर रुझान बढ़ा है। मेरी ओपीडी में करीब चालीस फीसदी मरीज बढ़ गए है। गंभीर बीमारियों के मरीज अब शुरुआती दौर में ही आने लगे हैं। दवाओं की बिक्री भी दोगुनी हो गई है। इस चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
कोरोना संक्रमण काल में होम्योपैथिक दवाओं के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ा है। होम्योपैथी दवा लेने वालों की संख्या में करीब बीस फीसदी की वृद्धि हुई है। ये बदलाव संक्रमण काल में ही देखने को मिला है।
- मुकेश कुमार, जर्मन होम्योपैथी सेंटर
कोविड में होम्योपैथी दवाएं कारगर रहीं। कोरोना काल में लोगों ने होम्योपैथी के महत्व को समझा है। मरीजों की संख्या हो या दवाओं की ब्रिकी है, हर क्षेत्र में ग्रोथ हुई है। पहले शहर में गिने चुने होम्योपैथी मेडिकल स्टोर थे, अब इनकी संख्या बढ़ गई है। कोरोना में जिन लोगों को होम्योपैथी दवाओं से फायदा हुआ है, अब वे दूसरे रोगों के लिए भी दवा लेने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति का प्रचार पसार होना चाहिए।
- मयंक शर्मा, आर्गनम होमियो हॉल
कोरोना में इन दवाओं का हुआ अधिक इस्तेमाल
वेनेडियम 30, एस्पिडोस्पर्मा क्यू, आर्सेनिक एलबम, इंफ्लूइंजिनम 200, मदर टिंचर, बेलाडोना, जेलसिनियम, ब्रायोनिया अश्वगंधा, गिलोय