मुरादाबाद में बड़े हादसे की साजिश नाकाम हो गई। यहां रेलवे ट्रैक पर पत्थर रख दिया। नैनी दून एक्सप्रेस पलटने से बच गई। ट्रेन 100 मीटर तक ट्रैक पर घसीटती गई। स्योहारा से आगे मेवानवादा के करीब यह घटना हुई। 1100 से अधिक यात्री ट्रेन में सवार थे।
सहरानपुर-मुरादाबाद रेल लाइन पर इतना बड़ा पत्थर कैसे आया। घटना के बाद रेलवे अधिकारियों के मन में यही सवाल है। माना जा रहा है कि आम यात्रियों की वहीं आवाजाही नहीं है। ऐसे में साजिश के तहत ट्रैक पर पत्थर रखे जाने का अंदेशा लगाया जा रहा है। हालांकि इस मामले में रेलवे ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मंडल मुख्यालय से होने वाली जांच में कई अहम पहलू सामने आने की उम्मीद है। आरपीएफ व जीआरपी भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। साथी ही रेलवे की इंटेलिजेंस यूनिट ने भी जांच शुरू कर दी है। इससे पहले 2022 में रामपुर के नजदीक मालगाड़ी का वैगन पटरी से उतरा था। तब पटरियों पर लगे बोल्ट गायब मिले थे।
इसमें रेलवे के जेई का निलंबन भी हुआ था। इंजीनियरिंग विभाग की ओर से रामपुर जीआरपी में अज्ञात के खिलाफ पटरियों से छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जीआरपी ने मामले की जांच की थी। इसमें विभाग की लापरवाही ही सामने आई थी।
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मंगलवार को ट्रेन में मौजूद रहे यात्रियों ने बताया कि पत्थर काफी भारी था। पटरी पर जिस तरह उसे रखा गया था, देखकर लग रहा था कि यह किसी ने साजिश के तहत रखा है। घिसटने के कारण इंजन का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि घटना स्थल के आसपास कोई नहीं था। रेलवे की टीम को पत्थर हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कांठ में डेढ़ घंटा खड़ी रही ट्रेन
ड्राइवर ने मेवानवादा से ट्रेन को आगे बढ़ाया जिससे अन्य ट्रेनें प्रभावित न हों। इसके बाद कांठ में रोककर घटनाक्रम रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। ट्रेन के ड्राइवर, सहायक ड्राइवर, गार्ड व यात्रियों के बयान दर्ज किए गए। इस दौरान ट्रेन कांठ में डेढ़ घंटा खड़ी रही। घटनाक्रम को रेल अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया। सारे मामले की जानकारी होने के बाद रेलवे प्रशासन ने फौरन इस मामले की जांच बैठा दी है।
रेलवे के स्टाफ ने मौके पर की थी पेट्रोलिंग
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पत्थर का वजन 100 किलो से ज्यादा था। इतना विशाल पत्थर ट्रैक पर कहां से आया, यह सवाल रेलवे अधिकारियों को परेशान कर रहा है। जिस क्षेत्र में घटना हुई वहां आरपीएफ पेट्रोलिंग नहीं करती है, लेकिन रेलवे के ट्रैकमैन वहां पेट्रोलिंग करते हैं।
इंजीनियरिंग विभाग के जिम्मेदारों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जहां घटना हुई वहां आम लोगों की आवाजाही भी नहीं है। ट्रैक पर बड़ा पत्थर कैसे आया, इसकी जांच कराई जा रही है।
पत्थर वहां कैसे आया यह जांच का विषय है, क्योंकि उस स्थान से लोग पटरियां पार नहीं करते हैं। रेलवे अपना काम कर रहा है। फिलहाल अच्छी बात यह है कि किसी को कोई क्षति नहीं पहुंची।- आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम