फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला अभियान: स्कूलों ने तैयार किए प्राथमिक उपचार कक्ष, कोविड प्रोटोकाल के पालन को विद्यार्थी भी हुए दक्ष

Tue, 22 Mar 2022 06:40 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, मुरादाबाद

सार

जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, सीबीएसई और आईसीएससी के नर्सरी से कक्षा 12 तक के करीब 1,908 विद्यालय हैं, जिनमें करीब 4.55 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
विज्ञापन
स्कूल खुले - फोटो : अमर उजाला-फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना संक्रमण की दो लहरों में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। तीसरी लहर में भी एक माह तक विद्यालय बंद रहे थे। इसकी वजह से विद्यालयों की व्यवस्थाओं में बदलाव हुआ है। निजी स्कूलों में प्राथमिक उपचार कक्ष तैयार किए गए हैं। कोविड प्रोटोकॉल का पालन विद्यार्थियों की आदत में शुमार हो गया है तो वहीं, अपने बच्चों का

विज्ञापन

एडमीशन करवाने पहुंच रहे अभिभावक भी स्कूलों में कोविड प्रोटॉकाल की व्यवस्थाओं को देख रहे हैं।

ब्रास सिटी सहयोदय कॉम्पलेक्स की कॉर्डिनेटर का कहना है कि करीब 98 फीसदी विद्यालयों में प्राथमिक उपचार केंद्र को व्यवस्थित किया गया है। जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, सीबीएसई और आईसीएससी के नर्सरी से कक्षा 12 तक के करीब 1,908 विद्यालय हैं, जिनमें करीब 4.55 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
मुरादाबाद में 18 मार्च 2020 को कोरोना संक्रमण की वजह से पहली बार स्कूलों को बंद किया गया था। इसके बाद दो बार लॉकडाउन की वजह से और तीसरी बार 16 जनवरी 2021 को कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की वजह से स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया था।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

सितंबर 2021 में डेढ़ वर्ष बाद पांचवीं तक के विद्यालयों को खोला गया था। इस बार स्कूल में व्यवस्थाएं बदली हुई थीं। बच्चों का स्वागत फूल बरसाकर और तिलक लगाकर किया गया। स्कूलों के गेट पर तापमान की जांच से लेकर कक्षाओं में बैठने तक पर कोरोना का असर दिखाई दे रहा था। यह बदलाव अभी तक बना हुआ है। इसके कारण शिक्षक ही नहीं, बल्कि विद्यार्थी भी कोविड प्रोटोकाल के नियमों का पालन करना अपनी आदत में शामिल कर चुके हैं।

अभिभावकों से भी करवाया जा रहा नियमों का पालन

आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल में सोमवार को विद्यार्थी शारीरिक दूरी का पालन कर पढ़ाई कर रहे थे तो अभिभावक अपने बच्चों के एडमीशन के लिए स्कूल में आए हुए थे। हेल्प डेस्क पर अभिभावकों के लाइन में लगने के लिए घेरे बनाए हुए हैं। गुरहट्टी क्रॉसिंग जेल रोड निवासी अभिभावक दिनेश भट्ट ने बताया कि वह अपनी बेटी का कक्षा सात में एडमीशन करवाने के लिए आए हैं। स्कूल के गेट पर उनके तापमान की जांच की गई और सैनिटाइजेशन किया गया। विद्यालय में तीन बेड का प्राथमिक उपचार कक्ष भी बनाया गया है। इसमें व्हीलचेयर, पल्स ऑक्सीमीटर के अलावा अन्य सुविधाएं हैं। प्रिंसिपल हेमंत झा ने बताया कि स्कूल खुलने के दौरान तीन ऐसे विद्यार्थियों को घर भेज दिया गया, जिनका जांच के दौरान तापमान अधिक मिला था। बाद में वह कोरोना पॉजीटिव मिले थे। स्टाफ की सतर्कता की वजह से संक्रमण फैलने से रुक सका था।

अभिभावकों से मांग रहे विद्यार्थियों की हेल्थ रिपोर्ट

पीएमएस स्कूल में दोपहर एक बजे शिक्षक विद्यार्थियों को इंटरमीडिएट टर्म-वन परीक्षा का परिणाम बता रहे थे। इस दौरान विद्यार्थी शारीरिक दूरी का पालन करते हुए बैठे थे।
प्रयोगात्मक कक्षाओं के दौरान 40 के बजाय अब 20 विद्यार्थियों का ग्रुप बनाया गया है। दोपहर में जो अभिभावक अपने बच्चों का एडमीशन करवाने आ रहे थे, उनसे विद्यार्थी की हेल्थ रिपोर्ट जमा करने को कहा जा रहा था।

प्रिंसिपल मैथ्यू पी एलिनचेरिल का कहना है कि एक फिजिशियन से अनुबंध किया गया है। यदि किसी विद्यार्थी की तबियत खराब होती है तो अभिभावकों के पहुंचने से पहले उसका उपचार शुरू करवाया जा सके, इसी उद्देश्य से हेल्थ रिपोर्ट मांगी जा रही है। क्योंकि कई बार विद्यार्थियों को कुछ दवाईयों से एलर्जी होती है या वह पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित होते हैं। जब हमारे पास हेल्थ रिपोर्ट होगी तो हम बिना समय गंवाए उपचार शुरू करवा सकते हैं।

स्कूल में जगह-जगह सैनिटाइजेशन की व्यवस्था

केसीएम स्कूल में परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। दोपहर एक बजे विद्यार्थियों को शारीरिक दूरी का पालन करवाते हुए बिठाया गया था। कुछ विद्यार्थियों के पास पैंसिल नहीं थी तो एक-दूसरे से लेने के बजाय शिक्षकों ने उन्हें पेंसिल उपलब्ध करवाई थी। प्रिंसिपल सुरेंद्र सिंह ने बताया कि विद्यालय में जगह-जगह सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गई है।

कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षक और कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। विद्यालयों में सैनिटाइजेशन, थर्मल स्कैनिंग, मास्क की व्यवस्था के अलावा करीब 98 फीसदी विद्यालयों में व्यवस्थित तरीके से प्राथमिक उपचार कक्ष बनाए गए हैं।
- शशि शर्मा, सिटी कॉर्डिनेटर, ब्रास सिटी सहयोदय कॉम्पलेक्स।

स्कूल में आकर भी दोस्तों से दूर बैठते हैं, ताकि किसी की तबियत खराब हो तो दूसरे छात्र को  परेशानी न हो।
- शिवांश लवानिया, छात्र।

क्लास से लेकर वॉशरूम तक नियमित सैनिटाइजेशन हो रहा है। हम स्वयं भी थोड़ी-थोड़ी देर बार हाथों को सैनिटाइज करते हैं।
- प्रगति अग्रवाल, छात्रा।

क्लास में एक सीट छोड़कर विद्यार्थियों को बिठाया जा रहा है। साथ में खेलने के बाद तुरंत हाथों को साबुन से धुलते हैं।
- यश कश्यप, छात्र।

स्कूल में नियमित थर्मल स्कैनिंग की जाती है। किसी छात्र के तापमान अधिक होने पर उसे स्कूल से वापस भी किया गया है।
- जान्हवी गौतम, छात्रा।

अब स्वच्छता के साथ सतर्कता हमारी आदत में शामिल हो गई है। यदि कोई शारीरिक दूरी का पालन नहीं करता है तो हम टोक देते हैं।
- निरेक, छात्र।

मास्क न लगाने पर चेहरे पर खालीपन महसूस होता है। इस बार साथ के छात्रों को जुकाम हुआ है तो उसका असर हमारे ऊपर नहीं हुआ।
- परी, छात्रा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें