22 वीं वार्षिक पुलिस घुड़सवार प्रतियोगिता में शिरकत करने के लिए अलीगढ़ के अश्व नेल्सन और गैलेक्सी तैयार ही नहीं हो पाए। ऐसे में वहां के अश्वारोहियों ने मुरादाबाद के घोड़ों पर ही दांव खेला।
प्रतियोगिता में आगरा टीम के कप्तान दिलशाद अहमद छह घोडे़ बलवान, मस्तमौला, टाईगर, राउडी, तेजस, चेतन, प्रयागराज टीम के कप्तान जयशंकर राय तीन घोड़े रणवीर, करन, महाराजा, लखनऊ टीम के कप्तान शिवाजी दूबे चार घोडे़ रोनाल्डो, सायमंड, राधा, ज्वाला, वाराणसी टीम के कप्तान कृष्णचंद्र यादव तीन घोडे़ सुल्तान, महाराणा, एलेक्जेंडर और मुरादाबाद टीम के कप्तान आरआई प्रेम बाबू 18 घोड़े पवन, प्रबल, परमवीर, स्वास्तिक, रेनू, राखी, नगीना, दक्ष, हीरो, अनंत, मोंटीना, राठौर, रिमझिम, डायमंड, ब्लैक ब्यूटी, शेरू, रामू और हेलन के साथ प्रतिभाग कर रहे हैं।
जबकि अलीगढ़ से आए घुड़सवार एसआईएमपी अशोक कुमार ने बताया कि अलीगढ़ में घोड़े प्रतियोगिता के लिए तैयार नहीं थे। उसके बदले स्वास्तिक से प्रतियोगिता की और वह अगले राउंड में क्वालीफाई कर गया।
दरअसल, प्रतियोगिता की तैयारी के लिए अलीगढ़ में मैदान भी नहीं है। इसी वजह से वह मुरादाबाद के घोड़ों पर सवार होकर अलीगढ़ की ओर से प्रतिभाग कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने प्रतियोगिता में अच्छे नंबर हासिल किए हैं।
उन्होंने बताया कि वह अलीगढ़ से पहले मुरादाबाद में ही कार्यरत थे। यहां पुलिस अकादमी के घोड़ों के बारे में वह अच्छी तरह से परिचित हैं। ऐसे में उनको उम्मीद है कि वह आगे भी प्रतियोगिता में वह अच्छा प्रदर्शन कर सफलता प्राप्त करेंगे।
घोड़े की देखभाल करना आसान नहीं है। लंबे समय से पुलिस अकादमी में घोड़ों की देखभाल का जिम्मा संभाल रहे साईस ओमप्रकाश ने बताया कि घोड़ों को रोजाना दो बार सेंड बाथ कराया जाता है, तीन बार मालिश की जाती है। जिससे की वह बीमार न हों और उनके शरीर में गंदगी न रहे।
ओमप्रकाश ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठते हैं। इसके बाद घोड़ों को साफ सुथरा कर तैयार किया जता है। सुबह छह बजे उनको परेड के लिए लाया जाता है। परेड़ के बाद उनको वापस अस्तबल में लाया जाता है।
यहां पर उनको रेत में लिटाया जाता है। मालिश की जाती है, जिससे की उनकी थकान मिट सके। सेंड बाथ कराने के बाद उनको करीब साढे़ सात बजे खाना दिया जाता है। दोपहर में डेढ़ बजे दोबारा खाना दिया जाता है। फिर मालिश की जाती है।
शाम को चार बजे उनको दोबारा परेड़ के लिए ले जाया जाता है। परेड़ से लाने के बाद दोबारा घोड़ों को रेत में लिटाया जाता है। इसके बाद सेंडबाथ कराया जाता है फिर उनकी मालिश की जाती है। जिससे की उनके शरीर में किसी तरह की गंदगी न रहे। देर शाम करीब साढे़ सात बजे उनको तीसरी बार खाना दिया जाता है। इसके बाद उनको सोने के लिए छोड़ दिया जाता है।
ये है प्रतिदिन खाना.. चना और गुड़ काफी पसंद
मुरादाबाद। एक किलो चना, दो किलो जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक, 100 ग्राम तेल, 100 ग्राम गुड़, 25 किलो घास एक घोड़ा रोजाना खाता है। घोड़ों को चना ओर गुड़ काफी पसंद हैं।