बदन पर खाकी है, कुछ के हाथ में लाठी तो कुछ के हाथ में बंदूक है, फिर भी हालत बेचारों और लाचारों जैसी है। कोरोना योद्धाओं के हरावल दस्ते के रूप में पुलिस कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर डयूटी कर रहे होमगार्ड्स जवानों को बीते चार माह से मानदेय नसीब नहीं हुआ है। आलम यह है कि आर्थिक तंगी के चलते किसी ने अपने बच्चे का दूध बंद करा दिया तो कोई बाइक खड़ी कर साइकिल से चलने को मजबूर है।
जिले में पुलिस बल की कमी है। इसकी भरपाई के लिए दो सौ होमगार्ड्स जवानों को ऐसे स्थानों पर ड्यूटी के लिए नियुक्त किया गया है। जहां नियमित पुलिस के जवान को नियुक्त किया जाना चाहिए। शस्त्रधारक ऐसे होमगार्ड बैंक से लेकर अन्य संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। पुलिस बल के स्थान पर नियुक्त किए जाने के कारण इनको आम होमगार्ड से अलग पुलिस कोटा नामक श्रेणी में रखा गया है।
इनका मानदेय भी अन्य होमगार्ड के समान ही है। पर इनको ड्यूटी के लिए मानदेय पुलिस विभाग देता है। इन्हें बीते चार माह से वेतन नसीब नहीं हुआ है। पिछले की तुलना में कोरोना महामारी के चलते इनकी ड्यूटी भी बढ़ गई है। लंबे समय से भुगतान न होने के कारण दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है। किसी होम गार्ड ने अपने बच्चे का दूध बंद करा दिया तो किसी ने अपनी बाइक खड़ी कर दी और घर से साइकिल से ड्यूटी स्थल तक पहुंच रहा है।
चार माह से वेतन नहीं मिला है। जबकि ड्यूटी बराबर कर रहे हैं। विभाग और शासन हमारी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हमारे लिए कोई भी सहूलियत नहीं है। अब वेतन के लिए भी महीनों से इंतजार कर रहे हैं।
-बहोरन सिंह होमगार्ड
लॉक डाउन और कोरोना काल में पूरी मेहनत और ईमानदारी से पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ड्यूटी कर रहे हैं। हमारा भी घर परिवार और बच्चे हैं। चार माह से वेतन नहीं मिला है। बच्चों का दूध बंद कर के घर के खर्च में कटौती कर दी गई है।
-मोहम्मद जरीफ होमगार्ड
हर विभाग को समय से वेतन दिया जा रहा है। लेकिन हमारे बारे में न कोई सरकार सोच रही और न ही हमारा विभाग सोच रहा है। चार माह से बिना वेतन के ड्यूटी कर रहे हैं। जिस कारण अब घर से ड्यूटी स्थल तक साइकिल से आते हैं।
-तनवीर सिंह, होमगार्ड