मुरादाबाद। मुरादाबाद रेल मंडल में रेल संचालन असुरक्षित हो गया है। बीस साल पुरानी जर्जर पटरियों पर ट्रेनों को दौड़ा कर लोगों की जिंदगी खतरे में डाली जा रही है। लॉक डाउन और कोरोना कॉल में अधिकांश ट्रेनों का संचालन बंद होने के बावजूद इन पटरियों को नहीं बदला जा सका, जबकि मौके पर ही महीनों से नई पटरियां पड़ी हैं।
मुरादाबाद रेल मंडल में करीब 27 सौ किलोमीटर रेल ट्रैक है। इनमें अधिकांश पटरियां बीस साल पुरानी बताई जा रही हैं। पुरानी और जर्जर पटरियां होने के कारण मंडल में तमाम जगह कॉशन लगाकर ट्रेनें गुजारी जा रही है। दिल्ली लखनऊ रेल ट्रैक मुरादाबाद रेल मंडल का मुख्य रेल मार्ग है। अधिक लोड होने की वजह से 52 किग्रा वाली पटरियों को हटाकर मजबूत और सुरक्षित माने जाने वाले 60 किग्रा की पटरियां बिछाने का कार्य चल रहा है। इन पटरियाें के बिछने के बाद ट्रेनें 120 किलोमीटर और उससे अधिक रफ्तार से दौड़ाई जा सकेंगी। मुरादाबाद रेल मंडल को हर साल तीन सौ किलोमीटर पटरियां बिछाने का लक्ष्य दिया गया है। दिल्ली लखनऊ डाउन व अप लाइन पर अधिक ट्रेनों का संचालन होने के कारण रेलवे बोर्ड से ब्लाक मिलने में दिक्कत होती है। लॉक डाउन में रेलवे के पास अच्छा वक्ता था। रेलवे इसका फायदा उठाकर पुरानी पटरियां हटाकर नई बिछाई जा सकती थी, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने इसमें वो तेजी नहीं दिखाई। इस साल अभी लगभग 145 किलोमीटर ही पटरियां बिछाई जा सकी हैं।
मुरादाबाद रेल मंडल को इस साल 300 किलोमीटर पटरियां बदलने का लक्ष्य मिला है। अब तक 145 किलोमीटर पटरियां बदली जा चुकी है। मुरादाबाद और सहारनपुर सेक्शन में सबसे ज्यादा पटरियां बदली गई हैं। काम चल रहा है।
नीरज कुमार, सीनियर डीईएन