मौसमी उतार चढ़ाव सेहत पर भारी पड़ने लगा है। सुबह एवं शाम की ठंड और दोपहर की धूप से वायरल फीवर के साथ गले के संक्रमण की शिकायत होने लगी है। निजी एवं सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में बच्चों से लेकर बुजुर्ग इन परेशानियों लेकर पहुंचने लगे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक सेहत की दृष्टि से मौसम ठीक नहीं है। इसमें लापरवाही बीमार कर सकती है।
मुरादाबाद मंडल उत्तराखंड से सटा है। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होती ही यहां मौसम करवट बदल लेता है। गुरुवार और शुक्रवार से मुरादाबाद जिले में बारिश हुई है। इससे मार्च के महीने में जनवरी जैसे ठंड का एहसास होने लगा है। जो लोग बारिश में भीगे हैं उनमें बुखार से पीड़ित होने लगे हैं। सुबह और शाम की ठंड और दोपहर में तेज धूप भी लोगों को बीमार कर रही है। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं, इस मौसम में एहतियात बरतने की जरूरत है। लेकिन अधिकतर लोग लापरवाही करते हैं और बीमार हो जाते हैं।
डा. राजेंद्र के मुताबिक ओपीडी में वायरल फीवर, गले में संक्रमण, खासी जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जो कि फरवरी आखिरी हफ्ते में काफी कम था। बुजुर्गों में भी सांस लेने में परेशानी और ब्लड प्रेशर की शिकायत बढ़ने लगी है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. सतीश सक्सेना बताते हैं, बच्चों में निमोनिया, बुखार, सर्दी जुकाम और गले में खराश की सबसे अधिक शिकायत हो रही है। ठंड लगकर बुखार आ रहा है। टाइफाइड से पीड़ित भी बच्चे पहुंच रहे हैं।
- बच्चों के प्रति एहतियात बरतने की जरूरत है। मौसमी बदलाव से बच्चे जल्दी बीमारियों की चपेट में आते हैं। सर्दी, जुकाम और बुखार के शुरुआती लक्षण दिखने पर ही डाक्टर की सलाह देनी चाहिए। - डा. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक
स्वाइन फ्लू के वायरस के लिए मौसम खतरनाक
उत्तरप्रदेश के कई जिलों में स्वाइन फ्लू की अब भी दहशत बनी है। मुरादाबाद जिले में स्वाइन फ्लू का भले ही कोई मरीज अभी तक चिह्नित नहीं हुआ है, लेकिन आसपास के जिलों में मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। रामपुर में एक व्यक्ति भी मौत तक हो चुकी है। मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। चिकित्सकों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के वायरस फैलने के लिए बारिश एवं नमी सबसे अधिक होता है। इस लिहाज से भी विभाग सतर्क है।