आलू की पकौड़ी का ठेला लगाने वाले राहुल कश्यप ने बताया कि अब सिलिंडर मिल ही नहीं रहा है। लिहाजा अंगीठी पर उपला या लकड़ी जलाकर काम चलाया जा रहा है। अब तो उपला भी पांच रुपये का एक मिल रहा है।
जबकि लकड़ी का भाव भी 10 रुपये किलो से बढ़कर 13 रुपये किलो तक पहुंच गया है। ठेला लगाने वाले समर अली का कहना है कि उनका कॉमर्शियल सिलिंडर कल दोपहर को खत्म हो गया था। एक दिन काम बंद रखा।
एक लोहे का चूल्हा खरीदा है जिसमें लकड़ी और उपला जलाकर चाय बना रहे हैं। दुकानदार राम सिंह ने बताया कि उपले आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं। हम तो गांव से लेकर आए हैं। पाकबड़ा के सद्दाम ने बताया कि बड़े होटल वाले कोयला ला सकते हैं लेकिन छोटे दुकानदारों को तो उपले और लकड़ी से ही काम चलाना पड़ रहा है।