भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की 20 दिसंबर को प्रस्तावित वाराणसी रैली कई क्षेत्रीय दिग्गजों का तो इम्तिहान लेगी ही, राष्ट्रीय नेताओं की साख भी दांव पर है।
पार्टी के लिए सूबे के सबसे कमजोर क्षेत्र के रूप में उभरे वाराणसी, इलाहाबाद, भदोही, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, गाजीपुर, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर जिले की 14 लोकसभा सीटों में सिर्फ वाराणसी ही उसके पास है। यह हाल तब है जब इसी क्षेत्र में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का घर है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी का संसदीय क्षेत्र है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह, केशरीनाथ त्रिपाठी, डॉ रमापति राम त्रिपाठी के गृह जनपद इसी क्षेत्र में हैं। कलराज मिश्र भी इसी क्षेत्र से जुड़े हैं।
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वर्तमान राज्य कार्यकारिणी के चारों महामंत्री पंकज सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, देवेंद्र सिंह चौहान और रामनाथ गोविंद भी इसी क्षेत्र से जुड़े हैं। संसदीय क्षेत्र बदल रहे वरुण गांधी की सक्रियता वाला सुल्तानपुर भी इसी क्षेत्र में है। ऐसे में सपा और बसपा के गढ़ के रूप में विकसित हो चुके काशी प्रांत के इन जिलों में मोदी की रैली की सफलता या असफलता का असर इन दिग्गजों की साख पर पड़ना तय है।
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सूबे में अब तक हुई चार रैलियों में अच्छी भीड़ जुटी थी लिहाजा दिग्गजों के लिए चुनौती बढ़ गई है। 1996 के बाद से लगातार भाजपा सांसदों की संख्या में कमी आ रही है। क्षेत्र में भाजपा के पतन के साथ ही सपा और बसपा ने खुद को काफी मजबूती के साथ उभारा है। पार्टी के ज्यादातर वोट इन्हीं पार्टियों में बंट गए। राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते इस क्षेत्र में भाजपा की साख फंसी है।