एमएलसी चुनाव के नतीजे को निर्वाचन क्षेत्र में ‘अंडर करंट’ की नब्ज की तरह देखा जा रहा है। सपा की अप्रत्याशित जीत ने कांग्रेस और भाजपा को बराबर वोल्ट का झटका दिया है।
सपा के हौसले बुलंद हैं। भाजपा दूसरे नंबर पर आना भी उपलब्धि मान रही है। कांग्रेस तो सपा-बसपा दोनों के हाथ लुटी। राजनीतिक विश्लेषक भी कह रहे हैं कि चुनाव परिणाम आगरा खंड स्नातक सीट से जुड़े 12 जिलों में लोकसभा की जंग पर असर डाल सकता है।
मोदी की लहर पर सवार भाजपा यह सीट कब्जाने में जी-जान से जुटी हुई थी। इससे जनता के बीच लहर की पुष्टि भी होती। लेकिन हुआ ठीक उलट। जिस पढ़े-लिखे तबके पर वर्चस्व का दावा है उसी ने इस चुनाव में भाजपा को नकार दिया।
पार्टी प्रत्याशी डा. ज्ञान प्रकाश गुप्त को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। हालांकि, पार्टी का कहना है कि निश्चित रूप से उसका जनाधार बढ़ा है। पिछले चुनाव की तुलना में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा। भाजपा का यह भी आरोप है कि चुनाव में सत्ता का दुरुपयोग भी किया गया। उनका यह भी तर्क है कि एमएलसी में जीत-हार से लोकसभा चुनाव का दमखम नहीं आंका जा सकता।