मिर्जापुर। तीन दिनी सूर्य उपासना के पर्व डाला छठ पर आस्था और उल्लास के बीच लोगों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। नदियों-घाटों और जलाशयों पर गोधूलि बेला अनगिनत दीपकों से जगमगा उठा। सूर्यास्त से पहले ही महिलाएं छठ मईया के गीत गाते हुए हुए अपनी वेदियों पर पहुंच गईं। घुटने पर पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य से प्रार्थना करने हुए उनके अस्त होने का इंतजार किया। इसके बाद व्रत वाले घरों में रातभर जागरण कर मंगल गाए गए। बृहस्पतिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा।
नगर के बरियाघाट में बड़ी तादाद में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने परिवार समेत पहुंचकर सूर्योपासना की। मन में श्रद्धा और होठों पर देवी गीत बाजे-गाजे के दउरी में पूजा सामग्री लिए घाटों की ओर बढ़ रहे थे। व्रती महिलाओं ने गंगाघाटो की की सीढ़ियों पर बनाई गईं वेदियों पर प्रसाद का दउरा और दउरी पूजा की सामग्री से भरे सूप रखकर व्रती आस्थाभाव से भगवान भास्कर का आह्वान किया। अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर महिलाओं ने सूख, समृद्धि व लोक कल्याण की कामना की। नगर के बिसुंदरपुर, फतहां, कचहरीघाट, बाबाघाट, पक्काघाट, नारघाट समेत प्रमुख घाटों पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया गया।
इमिलिया चट्टी, क्षेत्र में बाजे-गाजे के साथ सोनवर्षा खुर्द, खुटहां, अतरौली कला, गुलाब के पुरा, पटिहटा, अतरौली खुर्द, भुड़कुड़ा, आदि तमाम स्थान डाला छट पूजन धूमधाम से मनाया गया। गीत गाती पहुंची महिलाओं ने डूबते भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया।
डाला छठ महापर्व के तीसरे दिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। गंगाघाट तथा सरोवर तटों पर दउरी भरे प्रसाद के साथ महिलाएं और उनके परिजन उमड़े रहे। पूजन अर्चन के दौरान ऐसे स्थानों पर मेले जैसा नजारा देखने को मिला।
पड़री, स्थानीय क्षेत्र के कनौरा, कठिनई, पड़री बाजार, डाढ़ीराम, भरपुरा, भवरख, अघवार, पैड़ापुर, छटहां, रामनगर, सिंकरी, धरमदेवा, छटहां आदि गांवों में गंगा के किनारे व तालाबों के किनारे धूमधाम के साथ छठ पूजन कर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। चुनार, महापर्व डाला छठ पर व्रती महिलाओं ने नगर के बालूघाट, संतोषी माता मंदिर घाट, शिवाला घाट, रामघाट, बावन जी घाट सहित अन्य गंगाघाटों पर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर सुख समृद्धि के साथ पुत्र प्राप्ति व दीर्घायु होने की कामना की। दिन-भर निराजल रहकर सायं काल अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर जलते हुए दीपक को लेकर घर को वापस हुई। जिगना, व्रती महिलाओं ने विजयपुर रानी तालाब के साथ ही कठवैइया, पांडेयपुर, विरोही के अलावा कर्णावती नदी के घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य का पूजनकर अर्ध्य दिया। कछवां, क्षेत्र में केवटाबीर परमहंस आश्रय जगतानंद घाट, चडिया स्थित पोखरे और तालाबों पर महिला श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। घुटने भर पानी में खड़ी होकर महिलाओं ने डूबते भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। नगर पंचायत समेत ग्रामीण क्षेत्र में पूरी रात छठ मईया के गीत गूंजते रहे। राजगढ़, महिलाओं के श्रद्धा व आस्था का डाला छठ पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य सुख, शांति व समृद्धि के साथ ही पुत्र के दीर्घायु की कामना की। इस दौरान नदी तालाब पोखरे की साफ-सफाई कर रंग विरंगे इलेक्ट्रिक झालरों से लाइट से घाटों को सजाया गया था। तालाब के पास बैठकर महिलाएं रातभर जग कर छठी मैया का गीत भजन व कथाओं का श्रवण करती रहीं। वृहस्पतिवार को उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर छठ व्रत का समापन करेगी। हलिया, क्षेत्र के विभिन्न जलाशय, नदी, तालाब व नहरो के किनारे महिलाओं डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। अदलहाट, क्षेत्र में गाजे बाजे व डीजे के साथ छठी मइया की गीत गाते व्रती महिलाएं तालाब के किनारे पहुंचीं। नए परिधानों में सज धज कर विभिन्न व्यंजनों व तमाम प्रकार के फल-फूल से दउरी सजाए, घाटो पर बेदी बनाकर पूजन अर्चन के साथ अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य दिया। अहरौरा, नगर के सहुवाईन पोखरा सहित अन्य पोखरे और तालाबों पर डाला छठ का महापर्व महिलाओं ने धूमधाम के साथ मनाया। भगवान भास्कर के अस्त होते ही जहां व्रती महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया वहीं बच्चों ने पटाखे फोड़े। आकाशी पटाखा राकेट से आसमान सतरंगी हो गया। छठ पूजा को लेकर नगर पालिका की ओर से घाटों पर साफ सफाई,पेयजल की भी समुचित व्यवस्था की है।
संकठा घाट में छठी मईया का पुजा करती महिलाएं ।- फोटो : MIRZAPUR
संकठा घाट में छठी मईया का पूजा करती महिलाएं ।- फोटो : MIRZAPUR
संकठा घाट में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सैल्फी लेती महिलाएं ।- फोटो : MIRZAPUR
दाऊजी घाट में सूर्य को अर्घ्य देती महिलाएं व बालिकाएं ।- फोटो : MIRZAPUR
पक्काघाट में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद एक दुसरे को सिंदूर लगाती महिलाएं ।- फोटो : MIRZAPUR