जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को गोवंश आश्रय स्थलों की जिला स्तरीय अनुश्रवण व मूल्यांकन समिति की बैठक हुई। इसमें प्रभागीय वनाधिकारी, चारों एसडीएम समेत अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति के सदस्य के रूप नामित अधिकारियों में से 15 अनुपस्थित रहे। इस पर कड़ी नाराजगी जताते डीएम ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को बैठक में नहीं आने वाले सदस्यों, अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने तथा विभागीय कार्रवाई के लिये पत्राचार करने का निर्देश दिया।
डीएम ने कहा कि गोवंश की निगरानी एवं इलाज के लिये प्रत्येक गो आश्रय स्थल पर एक पशु चिकित्सक को प्रभारी बनाएं। प्रत्येक गोशाला में एक रजिस्टर रखा जाय। उसमें वहां मौजूद पशुओं की संख्या दर्ज की जाए। उसी के अनुसार जिला स्तर पर रिपोर्ट भी की जाए। ओवर रिपोर्टिंग मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सुरक्षा के लिए कांटे के तार के स्थान पर अनुपयोगी पाइप से बैरिकेडिंग कराने का निर्देश दिया। साथ ही सभी बीडीओ, और पालिका के ईओ को गो आश्रय स्थलों के लिए पूर्व में प्राप्त धन का उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराते हुए आगे के लिये डिमांड प्रस्ताव देने को कहा। 100 दिवसीय निराश्रित गोवंश संरक्षण अभियान के लक्ष्य को समय से पूरा करने की हिदायत दी। बैठक में नवीन गो आश्रय स्थल खोलने, गो आश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने आदि बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओम प्रकाश, तहसीलदार मड़िहान नूपुर सिंह, खंड विकास नरायनपुर के अलावा अन्य बीडीओ व पशु चिकित्साधिकारी मौजूद रहे।