संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। जिले के 49 पशु आश्रय स्थलों में 14835 संरक्षित पशु हैं। अब यही पशु आश्रय स्थल महिलाओं की आमदनी का जरिया भी बन रहे हैं। जिले के हर ब्लॉक में एक पशु आश्रय स्थल का चयन किया गया है, जहां पर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की तरफ से वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा रही है।
इस पहल से जहां जैविक खेती को जहां बढ़ावा मिलेगा, वहीं महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेंगीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त (स्वत: रोजगार) रमाशंकर सिंह ने बताया कि जिले के 12 ब्लॉकों में एक-एक गोशाला का चयन वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए किया गया था। बताया कि मार्च से शुरू की गईं वर्मी कंपोस्ट यूनिटों से अभी तक 5751 किलो वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा चुकी है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इसे वन विभाग, उद्यान विभाग और एफपीओ को 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचती हैं। अभी तक गोशालाओं के गोबर से तैयार वर्मी कंपोस्ट बेचकर महिलाओं को 35888 रुपये की आमदनी हो चुकी है।
बताया कि अभी तक सबसे ज्यादा छानबे विकासखंड के अंतर्गत विजयपुर में संचालित वर्मी कंपोस्ट यूनिट में 3100 किलो वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा चुकी है।