- गंगा कछार के सीमांत किसानों की आजीविका पर संकट, फसल सुरक्षा और मुआवजे की मांग
नरायनपुर। वाराणसी-मिर्जापुर हाईवे किनारे गंगा तटवर्ती शेरपुर समेत चुनार क्षेत्र के वेलवारी, बिजुड़का, फत्तेपुर, प्रतापपुर, दर्रा, रामरायपुर, चंदापुर, भवानीपुर और गांगपुर गांवों के सीमांत एवं कम जोत वाले किसान नीलगायों के आतंक से परेशान हैं। सब्जी और मौसमी फसलों पर निर्भर इन किसानों की मेहनत नीलगायों के झुंड उजाड़ रहे हैं, इससे उनकी आजीविका संकट में पड़ गई है।
गंगा किनारे की उर्वर रेतीली भूमि पर किसान सब्जियों की खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। किसानों का कहना है कि बड़ी संख्या में नीलगायें तैयार फसलों को न केवल खा रही हैं, बल्कि उन्हें रौंदकर भी नष्ट कर दे रही हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले गंगा तटवर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त बाग-बगीचे और प्राकृतिक आश्रय स्थल होने से वन्य जीवों का निवास वहीं बना रहता था, लेकिन समय के साथ इनके समाप्त होने से नीलगायों के झुंड कछारी क्षेत्रों और कृषि भूमि के आसपास रहने लगे हैं। उनका कहना है कि इससे वन्य जीवों के प्राकृतिक जीवन के साथ-साथ किसानों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
चंद्रकांत त्रिपाठी, रामप्रसाद और रामधारी सहित किसानों ने बताया कि प्रभावित किसानों के लिए न तो प्रभावी फसल बीमा योजना उपलब्ध है और न ही सरकारी दरों पर बीज, खाद आर अन्य कृषि संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था है। फसल क्षति की स्थिति में किसानों को किसी प्रकार की राहत या मुआवजा भी नहीं मिल पाता। किसानों ने जिलाधिकारी और वन विभाग के अधिकारियों से गंगा कछार क्षेत्र में बढ़ती नीलगायों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।