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महामारी से उबरे बिना कपड़ो पर टैक्स बढ़ाना अनुचित

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मिर्जापुर। अगले वर्ष एक जनवरी से जीएसटी बढ़ाने के जीएसटी परिषद के निर्णय से रेडीमेड कपड़ा के विक्रेताओं में हलचल मची हुई है। व्यवसाय से जुड़े थोक व फुटकर कारोबारी प्रस्तावित टैक्स बढ़ाने के फैसले का विरोध किया है।
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दो वर्षों से कोरोनाकाल झेल रहे कारोबारियों का कहना है कि चुनाव आगे है। ऐसे में टैक्स का भार उचित नहीं। यदि व्यापारी नाराज होगा तो फिर वोट कैसे देगा। इस वर्ष संकट से उबरे नहीं कि जीएसटी बढ़ने से उनकी कमर ही टूट जाएगी। हजार रुपये के माल पर पांच प्रतिशत टैक्स व इससे ऊपर के कपड़ों पर 12 से 18 प्रतिशत टैक्स दी जा रही है। महामारी के चलते लोगों के पास पैसे रह ही नहीं गए हैं। रेडीमेड कपड़ों पर अतिरिक्त टैक्स बढ़ने से दुकानदारों के साथ ही इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा। समस्याओं को देखते हुए जीएसटी परिषद को अपने निर्णय पर विचार करना चाहिए।
इनसेट
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- यदि सरकार ने जीएसटी बढ़ाया तो व्यापार पर निश्चित रूप से असर दिखेगा। इससे व्यापारियों को नुकसान होगा। ग्राहक के लिए भी जीएसटी बढ़ाना उचित नहीं है।- अविनाश भरद्वाज।
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- महामारी की दौड़ से लोग अभी उबर नहीं पाए हैं। चुनाव भी सामने है, व्यापारी नाराज होगा तो वोट कैसे देगा।- विजय कुमार।
- कोरोना महामारी के चलते दुकानदार वैसे ही टूट चुके हैं, टैक्स बढ़ा तो व्यापारी कहीं के न रह जाएंगे। -सुरेशचंद अग्रहरि।
-रेडीमेड वस्त्र व्यापारी एक लाख के व्यापार पर पांच से 12 प्रतिशत टैक्स भर रहा। इसके बावजूद बढ़ाने का कोई मतलब नहीं।- वरुण गुप्ता।
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