फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिर्जापुर में थी शास्त्री जी की ननिहाल व ससुराल

विज्ञापन
विज्ञापन
मिर्जापुर। पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री अपनी सादगी के प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा देकर फौजी और किसानों को एक सूत्र में बांधा था। शास्त्री जी की ननिहाल व ससुराल मिर्जापुर में ही थी। गणेशगंज निवासी लल्लन बाबू उनके मामा थे। वे प्राय: वहां आया जाया करते थे। यह सिलसिला प्रधानमंत्री बनने तक चलता रहा। उनका ननिहाल गैबी घाट में था।
विज्ञापन

उनका विवाह ललिता शास्त्री से हुआ था। विवाह के समय आंगन में शादी विवाह संबंधी सामान रखा जाने लगा। यह देख लाल बहादुर शास्त्री ने सामान को रखे जाने से मना कर दिया। दहेज में कुछ भी ले जाने से इनकार कर दिया था, उन्होंने शगुन में केवल चांदी का सिक्का लिया था। वह खुद ही दुल्हन के लिए खद्दर की धोती लाए थे। सामान को छोड़ केवल एक जोड़ी कपड़े में जीवन संगिनी ललिता जी को ले गए। ससुराल पक्ष की महिला सदस्य पुष्पा मोहन पत्नी मदन मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि घर के लोग उस समय हैरत में पड़ गए थे और उसी धोती में दुल्हन बनीं ललिता जी की विदाई की गई। उनके घर में वह आंगन आज भी सुरक्षित व संरक्षित है जहां पर लाल बहादुर शास्त्री का विवाह हुआ था।
ललिता शास्त्री के परिवार के लोग शास्त्री जी के विचारों और परंपरा को सहेजने में जुटे हैं। ललिता शास्त्री प्राथमिक स्कूल से उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। परिवार के सदस्यों का मानना है कि ऐसी महान हस्तियों से पारिवारिक संबंध होना अपने आप में बड़ी बात है। उनकी विरासत को जितना भी संभाल पाएं, यही बहुत है और उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।
विज्ञापन

इनसेट
जिले में शास्त्री जी के हैं कई संस्मरण
जिले में शास्त्री जी के कई संस्मरण हैं। एक बार प्रधानमंत्री बनने के बाद जब लालबहादुर शास्त्री पहली बार ससुराल पहुंचे तो उन्होंने गैबी घाट मोड़ पर ही सुरक्षा दस्ते को रोक दिया। वे पैदल ही पत्नी ललिता जी के आवास की ओर निकल पड़े। परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी इसी आत्मीयता के लोग कायल रहे। वे जब भी किसी से मिलते तो हमेशा हाथ जोड़कर प्रणाम करते थे। इसी प्रकार उनके ननिहाल के परिवार के सदस्य प्रशांत श्रीवास्तव पुत्र अरुण कुमार श्रीवास्तव (बुआ के लड़के) ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद लौटने पर सुरक्षा बेहद सख्त थी। रक्षाकर्मियों की इजाजत के बिना कहीं भी जाने की इजाजत नहीं थी। पिता अरुण कुमार श्रीवास्तव बिना बताए अपने मित्र से मिलने चले गए। वापस लौटने के बाद सुरक्षाकर्मी घर में घुसने नहीं दे रहे थे, शास्त्रीजी के कहने पर ही अंदर प्रवेश मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें