30 जुलाई को दर्शन कराने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई थी मारपीट
पुलिस ने शांतिभंग में किया था चालान, एक अगस्त को श्री विंध्य पंडा समाज ने जारी किया था नोटिस
मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी मंदिर में यजमान को पहले दर्शन कराने के लिए गर्भगृह में हुए विवाद के बाद मंदिर परिसर में मारपीट के मामले में श्री विंध्य पंडा समाज ने कार्रवाई करते हुए दो पंडों अमन गिरि और शक्ति दुबे को एक सप्ताह के लिए मंदिर में तीर्थ पुरोहित का कार्य करने से मना कर दिया। इससे पहले पंडा समाज ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में 30 जुलाई को अजय दुबे यजमान को वीआईपी दर्शन कराने के लिए गर्भगृह ले गए। वहां दर्शन कराने के दौरान उनका दूसरे पुरोहित अमन गिरि से विवाद हो गया। दोनों जब गर्भगृह से बाहर आए, तो अमन ने अजय दुबे को घूंसा जड़ दिया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने दोनों को पकड़कर बीच-बचाव किया, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ।
इसके बाद अजय दुबे के परिजन पहुंचे और अमन की मंदिर परिसर से परिक्रमा पथ होते हुए मुख्य द्वार तक पिटाई करते ले गए। मंदिर परिसर में मारपीट से अफरा-तफरी मच गई। अमन गिरि ने थाने में तहरीर दी थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपस में सुलह कर ली। इसके बावजूद पुलिस ने दोनों पक्षों का शांतिभंग में चालान किया। मंदिर परिसर में मारपीट मामले में श्री विंध्य पंडा समाज ने एक अगस्त को दोनों पुरोहितों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। बुधवार को श्री विंध्य पंडा समाज ने कार्रवाई संबंधी पत्र जारी किया।
श्री विंध्य पंडा समाज के मंत्री भानू पाठक ने जारी पत्र में बताया कि 30 जुलाई को मंदिर परिसर में हुई मारपीट के संबंध में व्यवस्थापिका समिति की बैठक हुई। बैठक में सभी सदस्यों ने निर्णय लिया कि मारपीट की मामला मंदिर की मर्यादा और आम जनमानस के लिए घोर निंदनीय है। अमन और शक्ति को छह से 12 अगस्त तक मंदिर में तीर्थ पुरोहित का कार्य करने से वंचित किया जाता है।
वर्जन
30 जुलाई को यजमान को पहले दर्शन कराने के विवाद में अमन गिरि ने अजय दुबे को घूंसा मारा। इसके बाद अजय दुबे के पुत्र शक्ति दुबे ने अमन गिरि की पिटाई की थी। मामले में श्री विंध्य पंडा समाज की व्यवस्थापिका समिति की बैठक के बाद पुरोहित अमन गिरि और शक्ति दुबे को एक हफ्ते के लिए सेवा से हटा दिया गया है।
पंकज द्विवेदी, अध्यक्ष, विंध्य पंडा समाज