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नहरों ने दिया धोखा, सिंचाई हो रही प्रभावित

Tue, 26 Apr 2016 05:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
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यमुना में जल की कमी से सूनी हुई धरती की कोख - फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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 विकास खंड जमालपुर के करीब पांच दर्जन गांवों के किसान प्रकृति पर आधारित खेती-किसानी करने के लिए मजबूर हैं। जब प्रकृति मेहरबान होती है तो किसानों के घरों में अन्न के दाने पहुंचते हैं, अगर प्रकृति ने भृगुटी तरेरी तो किसानों को चिंता सताने लगती है। कहने को तो नहरों एवं नालों का जाल बिछा हुआ है, लेकिन सिंचाई के नाम पर प्रकृति की मेहरबानी ही किसानों के लिए मुफीद साबित होती है। 
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विकास खंड जमालपुर में करीब पांच हजार, पांच सौ एकड़ भूमि पर गेहूं, धान, मसूर, अरहर, मटर, चना, सरसो, तीसी, मूंग, उड़द, गन्ना सहित सब्जियों की भी खेती की जाती है।     सरकारी सुविधा के नाम पर सिंचाई के लिए प्रथम पंचवर्षीय योजना में अहरौरा जलाशय का निर्माण तो कराया गया लेकिन जलाशयों की क्षमता का ध्यान नहीं दिया गया और दावा किया गया कि अहरौरा बांध 22 हजार एकड़ क्षेत्र को सिंचित करेगा, लेकिन हर वर्ष यह दावा खोखला साबित हो रहा है। जमालपुर ब्लाक के नहराें की दशा अत्यंत खराब है। ब्लाक में हुसेनपुर बीयर, बेलहर राजवाहा, शेरवां-भाईपुर माइनर, भाईपुर बैरियर से देवरिला माइनर, शेरवां गौरी माइनर, हुसेनपुर से शेरवां माइनर, जफराबाद से बिक्सी माइनर, बिक्सी से चैनपुरवा माइनर नहरें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं तथा नहरों की तलहटियों से धूल उड़ रही है।
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  इसके अलावा अहरौरा जलाशय से निकली गड़ई प्रणाली की गड़ई नदी भी सूखी हुई है।     जब कभी नहराें में पानी छोड़ा जाता है तो पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है, जिससे समय से किसानों के फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती है। 22 जून तक अगर बारिश नहीं होती है तो किसानों के माथे पर पसीना आना शुरू हो जाता है। उनको इस बात की चिंता सताने लगती है कि उनके खेतों में धान की नर्सरी पड़ेगी की नहीं। कमोबेश यही हाल नवंबर में गेहूं की बुवाई को लेकर होता है।  
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