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शहर को चाहिए एक अदद कांजी हाउस

Fri, 01 Apr 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर।
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जिन चौराहों पर यातायात पुलिस की आवश्यकता है वहां पशु रात दिन पहरा दे रहे हैं। खुलेआम गोवंश को सड़कों पर छोड़ देने से यातायात प्रभावित हो रहा है। शहर ही नहीं बल्कि विन्ध्यधाम की गलियों में भी छुट्टा पशु आवारगी करते दिख रहे हैं। इससे वहां पहुंचे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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नवरात्र के पूर्व जिला प्रशासन ऐसे पशुओं को कैद करने की योजना बनाता है लेकिन शेष समय हालत ऐसी ही रहती है। शहर में एक अदद कांजी हाउस भी नहीं है जहां आवारा पशुओं को कैद किया जा सके। 


किसी भी शहर की पहचान वहां के लोगों की सभ्यता संस्कृति के साथ साथ उसकी सड़कों से होती है। रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद आगंतुक का पाला शहर की सड़कों से पड़ता है। जब बात अपने शहर की हो तो यहां आम लोगों के अलावा पशुओं का झुंड भी सड़कों पर कब्जा जमाये मिल जाते हैं।
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इसके लिए पशुपालकों की मानसिकता भी कम जिम्मेदार नही है। दूध दूहने के बाद पशुपालक अपने पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। बछड़े तो पशुपालक के यहां पलते ही नहीं वे सड़कों पर ही बछड़े से सांड़ का रूप ले लेते हैं जो कई लोगों को मार कर घायल कर देते हैं।

शहर का संग मोहाल हो या फिर रमईपट्टी, हर मोहल्ले की प्रमुख सड़क पर इनका निवास स्थान बना हुआ है। घंटाघर, गणेशगंज और मुकेरी बाजार सब्जी मंडी में भोजन के रूप में सड़ी गली सब्जियां प्राप्त होने से छुट्टा पशु यहां से नहीं हटते हैं। कई बार राह में चलने वाले बुजुर्ग इनके शिकार बन चुके हैं।


स्कूली बच्चों को सबसे अधिक खतरा इन्हीं छुट्टा पशुओं से ही है। विन्ध्याचल में तो मंदिर की सीढ़ियों तक इनका दखल है। नवरात्र को छोड़ दिया जाय तो छुट्टा पशु गलियों में विचरण करते हुए मिल जाते हैं। 
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