बच्चों को ले जाने और ले आने के लिए स्कूली वाहन लगाए गए हैं। इन वाहनों के फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते स्कूल जाने और घर आने के लिए खतरों की सवारी कर रहे हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह चलने के बाद भी संबंधित विभाग वाहनों की फिटनेस की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। परिवहन विभाग की तरफ से जिले में 604 वाहनों को ही परमिट जारी किया गया है, परंतु इससे कहीं अधिक वाहन चल रहे हैं। जिनकी फिटनेस की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पूर्व में कई बार स्कूली वाहनों का फिटनेस नहीं होने के कारण हादसे का शिकार हुए हैं। इसके बाद अभियान चलाकर स्कूली वाहनों का फिटनेस कराने के लिए निर्देश भी दिए गए। हादसे के बाद कुछ दिनों तक तो सक्रियता दिखती है, किंतु बाद में फिटनेस के प्रति उदासीन रवैया अपना लिया जाता है। बीते दो वर्षों से कोविड संक्रमण के चलते वैसे तो स्कूल बंद थे। इस कारण स्कूलों में लगे वाहन भी नहीं चल रहे थे। अब स्कूल पूर्व की तरह संचालित हो रहे हैं। स्कूली वाहनों में लगे वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने और ले आने का काम कर रहे हैं, परंतु उनकी फिटनेस की जांच नहीं हो सकी है। स्कूल प्रशासन भले ही वाहनों के फिट होने की बात कहे, परंतु इसकी जांच तो परिवहन विभाग को करनी होती है। जिले में करीब 150 स्कूलों में 604 वाहनों को परमिट जारी है। इसमें 52 सीटर बसों से लेकर आठ सीटर मैजिक शामिल हैं। पिछले कई साल से स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच नहीं हुई है।इसके अलावा काफी संख्या में बिना परमिट वाले वाहन भी स्कूली बच्चों को ढो रहे हैं। इससे खतरे की आशंका बराबर बनी रहती है। उधर, जिले में जिन 604 वाहनों को परमिट दिए गए हैं। वे डीजल और पेट्रोल वाहन हैं। इसके बाद भी जिले के कई स्कूल सीएनजी किट वाले वाहनों से बच्चों को ढो रहे हैं। इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में सीएनसी वाहन खतरनाक हो सकते हैं। एआरटीओ विवेक शुक्ल का कहना है कि स्कूल वाहनों के लिए सीएनसी किट की परमिट नहीं है। एआरटीओ विवेक शुक्ला का कहना है कि जिले में लगभग 150 स्कूलों में 604 बड़े और छोटे वाहनों को परमिट जारी किया गया है। सीएनजी के लिए परमिट नहीं दिया गया है। वाहनों के फिटनेस जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा।